नई दिल्ली:– भारत में सोना पारंपरिक तौर पर काफी महत्व रखता है. सोने की ज्वैलरी का जितना क्रेज भारत में है शायद ही किसी देश में हो. इसके अलावा सोना हमेशा से निवेश के लिए भी एक सुरक्षित जरिया माना जाता है. लेकिन अब समय बदल चुका है और लोग पारंपरिक सोने की बजाय डिजिटल गोल्ड की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं. डिजिटल गोल्ड में आप बिना किसी लॉकर या सुरक्षा की चिंता के निवेश कर सकते हैं.
इसे आप मोबाइल ऐप या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से खरीद सकते हैं, चाहे रकम छोटी ही क्यों न हो. दूसरी ओर नॉर्मल सोने में खरीद, शुद्धता और स्टोरेज का झंझट बना रहता है. इसलिए बहुत से लोग अब डिजिटल गोल्ड में भी निवेश कर रहे हैं. कई लोगों के मन में सवाल उठता है कि असली फायदा किसमें है डिजिटल गोल्ड में या फिजिकल गोल्ड में? चलिए आपको बताते हैं इस बारे में जानकारी.
डिजिटल गोल्ड में क्या हैं फायदे?
आजकल लोग पारंपरिक तौर पर चली आ रही गोल्डन ज्वेलरी खरीदने के बजाय डिजिटल गोल्ड में ज्यादा निवेश कर रहे हैं. डिजिटल गोल्ड में निवेश का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें आपको असली सोने की तरह उसे घर पर रखने की जरूरत नहीं पड़ती. आप जितनी रकम चाहें उतने का सोना खरीद सकते हैं. भले ही वह 100 रुपये का ही क्यों न हो. यह 24 कैरेट प्योर गोल्ड में निवेश होता है.
जिसे भविष्य में किसी भी वक्त बेच सकते हैं. कई प्लेटफॉर्म जैसे पेटीएम, गूगल पे और फोनपे पर इसे खरीदा जा सकता है. चोरी या खराब होने का डर नहीं होता क्योंकि सोना सुरक्षित वॉल्ट में रखा जाता है. इसके साथ ही यह निवेश को लिक्विड बनाता है. यानी जरूरत पड़ने पर तुरंत नकद में बदला जा सकता है. छोटे निवेशकों के लिए यह अच्छा ऑप्शन बन गया है.
नॉर्मल सोने में फायदे?
अगर डिजिटल गोल्ड के मुकाबले फिजिकल गोल्ड की बात करें तो इसके भी अपने फायदे हैं. डिजिटल गोल्ड जहां डिजिटली तौर पर स्टोर होता है. उसे आप कहीं लेकर नहीं जा सकते हैं उसका इस्तेमाल नहीं कर सकते. मगर फिजिकल गोल्ड को आप अलग-अलग फंक्शंस पर पहन सकते हैं. उसे दिखा सकते हैं. लोग इसे सिर्फ निवेश नहीं बल्कि पारिवारिक संपत्ति के रूप में देखते हैं.
सोने के गहने को आसानी से गिरवी रखकर कर्ज लिया जा सकता है. बाजार में भाव बढ़ने पर इसे बेचकर सीधा फायदा उठाया जा सकता है. लोग लंबे समय के निवेश के लिए कई लोग फिजिकल गोल्ड को ज्यादा स्थिर मानते हैं. अगर आप सुरक्षित संपत्ति चाहते हैं तो डिजिटल गोल्ड बेहतर है. लेकिन परंपरा और भावनात्मक मूल्य के लिहाज से नॉर्मल सोना अभी भी अपनी जगह मजबूत बनाए हुए है.
