नई दिल्ली:- हरियाली बिखेरने वाले बारिश के खुशगवार मौसम का स्वागत जहां मोर अपने अनूठे नृत्य से करते हैं इसी दरमियान वे अपने पंख भी बदलते हैं. नतीजतन जंगल और ग्रामीण क्षेत्र से मोर पंख एकत्र करके देश के विभिन्न इलाकों में आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व के कारण बेचे जाते हैं. मोर पंख जहां आध्यात्म का प्रतीक है वहीं मोर पंख के धार्मिक और वस्तु आधारित महत्व के कारण इसकी मांग लगातार बनी रहती है.
मोर पंख का धार्मिक और आध्यत्मिक महत्व
आमतौर पर मोर पंख का उपयोग सजावट की सामग्री के अलावा जन्माष्टमी पर्व पर धार्मिक उपयोग और मोर पंख छड़ी बनाने के लिए किया जाता है. इसके अलावा मोर पंख का वस्तु आधारित प्रयोग भी है जिसके कारण मोर पंख घर-घर में नजर आता है. दरअसल मोर पंख वास्तु के अनुसार दक्षिण पूर्व दिशा में रखने से घर में नवग्रह का वास होता है और सुख शांति आती है. वहीं संकट भी दूर होते हैं. मोर पंख भगवान कृष्ण का आभूषण है जिससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है. हिंदू मान्यताओं के अनुसार मोर पंख रखने से फिजूल खर्ची भी नियंत्रित होती है. वहीं मोर पंख के कारण काल सर्प दोष से भी मुक्ति मिलती है. इसके अलावा भगवान कृष्ण के मंदिर में मोर पंख अर्पित करने से भक्तों पर कृपा बरसती है. यही वजह है कि लोग घरों में धार्मिक और आध्यात्मिक कार्य से मोर पंख घर में और मंदिरों में जरूर रखते हैं.
हर समय रहती है मोर पंख की डिमांड
इंदौर में मोरपंख की हमेशा डिमांड बनी रहती है यही कारण है कि यहां हर साल उत्तर प्रदेश के आगरा और औरैया जिलों से मोर पंख बिकने के लिए आते हैं. मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों के अलावा महाराष्ट्र के नासिक नागपुर समेत अन्य इलाकों से भी हर साल मोर पंख बिकने आते हैं. जिन्हें उनके धार्मिक उपयोग और नकारात्मकता दूर करने के कारण बाजार में बेचा जा रहा है.
एक मोर पंख की कीमत 10 रुपये
उन्नत किस्म का मोर पंख 8 से 10 रुपये के नग से बेचा जाता है, हालांकि इसे बेचने वाले औरैया के छोटू ठाकुर बताते हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में एक मोर पंख 5 से 6 रुपये में मिलता है. जहां से खरीद कर इंदौर में इसे 8 से 10 रुपये प्रति मोर पंख के हिसाब से बेच रहे हैं. उन्होंने बताया बारिश के सीजन से जन्माष्टमी तक उनके मोर पंख आमतौर पर बिक जाते हैं.
