
यहां वे 14वें भारत-जापान शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे और भारतीय समकक्ष पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। खबर है कि इस दौरान दोनों नेताओं के बीच यूक्रेन पर रूस के आक्रमण और चीन के साथ संबंधों के मुद्दा खासतौर से चर्चा होगी। चार देशों के समूह क्वाड में भारत और जापान के अलावा अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया भी शामिल हैं।
हिंद-प्रशांत में चीन के बढ़ते कदमों के मद्देनजर पीएम किशिदा और पीएम मोदी क्षेत्र में साझेदारी मजबूत करने के लिए मुलाकात करेंगे। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि शनिवार को होने वाली बैठक में क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर बातचीत का मौका मिलेगा। उन्होने यह भी कहा कि उम्मीद की जा रही है कि यूक्रेन पर रूसी आक्रमण औऱ चीन के साथ संबंधों पर विशेष चर्चा हो सकती है।
रूस पर क्या है दोनों देशों की प्रतिक्रिया
एक ओर जहां जापान ने रूस के खिलाफ आर्थिक प्रतिबंधों की घोषणा की है। वहीं, पड़ोसियों के इस संघर्ष में भारत किसी का पक्ष लेने से बच रहा है। संयुक्त राष्ट्र में भी भारत ने रूस के खिलाफ मतदान नहीं किया था। भारत का कहना है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता लाने के लिए जापान के साथ संबंध काफी अहम हैं।
ऐसे समझें व्यापारिक रिश्तों का गणित
भारत मुख्य रूप से जापान में पेट्रोलियम उत्पाद, केमिकल, मछली, कपड़े, लोहा और स्टील प्रोडक्ट्स, टेक्सटाइल यार्न, फैब्रिक्स और मशीनरी निर्यात करता है। वहीं, आयात में इलेक्ट्रिकल मशीनरी, लोहा और स्टील प्रोडक्ट्स, प्लास्टिक, वाहनों के पार्ट्स, ऑर्गेनिक केमिकल्स और मेटल्स शामिल हैं। साल 2000 और 2019 में भारत में जापानी निवेश 32 बिलियन डॉलर पर पहुंच गया है।