विपुल कनैया – सितागांव : बदलते समय के साथ शहर में रहने वाले लोगों की सोच बदलती जा रही लेकिन गाँव में आज भी लोगों रूढ़िवादी परम्परा से खुद को बांधे हुए है। भारत देश में हम सीता माता की पूजा करते है, लेकिन छत्तीसग़ढ के गांव सीतागांव में बरसो से महिलाओ के साथ अछुतो जैसा व्यवहार मासिक धर्म (पीरियड) के दौरान किया जा रहा है।
आज भी इस इलाके में मासिक धर्म के दौरान घर वाले महिलाओं को घर से बाहर कर देते है। गांव में प्रत्येक घरो में एक कुटिया बनी हुई है, जहां महिला मासिक धर्म के समय सप्ताह भर तक रात गुजरती है। वनांचल क्षेत्र में महिलाओं को मासिक धर्म काफी समस्या होती है। स्थानी लोगों लोगों का कहना है, घर से बाहर रहने की परम्परा सालो से इलाके में चली आ रही है। गांव से बाहार टूटी-फूटी बदबूदार गन्दी कुटिया में 3 से 5 दिन गुजारना पड़ता है, परिवार के लोग थाली में खाना वहीं छोड़ देते है, आसपास गन्दगी पसरी हुई रहती है, सुअर आसपास डेरा जमाए रहते है।जबकि ऐसे समय मे महिलाओं को संक्रमण का खतरा बना रहता है। इस विषय मे हम लम्बे समय से काम कर रहे है, कई बार शासन- प्रशासन का ध्यानाकर्षण भी कराया, शासन- प्रशासन ने जागरूकता लाने का प्रयास भी किया लेकिन असफल रहें।
शहर में सभ्रांत परिवार की महिलाओं ने कई संघठन बनाये है, जो समाज के लिए कई रचनात्मक कार्य करते रहते है, अभी गर्मी के मौसम में चौक- चौराहों पर लोगों को शर्बत पिलाते नजर आते है।उन महिला संगठनों से आग्रह है, की उन गाँवों तक पहुंचे और उस क्षेत्र के महिला- पुरुषों में इस प्रकार की रूढ़िवादी परम्परा को खत्म कर सामान्य जीवन शैली से अवगत करावें।