नई दिल्ली :- ऐसी मान्यता है कि पीपल कके वृक्ष में देवी देवताओं का वास होता है। श्रीमद्भगवद्गीता में भी भगवान कृष्ण ने बताया है कि पीपल उन्ही का एक स्वरुप है। ऐसी मान्यता है कि पीपल के वृक्ष की पूजा करने से भगवान कृष्ण बहुत प्रसन्न होते हैं और व्यक्ति को अपने दुखों से राहत मिलती है।
पीपल की जड़, मध्य भाग और अग्रभाग में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का निवास माना जाता है। इसके अलावा भी कई देवी देवताओं का निवास माना जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं क्या पीपल का वृक्ष काटना चाहिए या नहीं।
पीपल को हिंदू धर्म में काफी पवित्र माना गया है। कई बार आपने देखा होगा की पीपल का पौधा कही भी उग जाता है। आपने देखा होगा की पानी की टंकी के पास गेट के आसपास कई बार पीपल का पौधा उग जाता है। अब हम में सवाल यह आता है कि पीपल का पौधा काटना चाहिए या नहीं? इसको लेकर मन में भ्रम की स्थिति बनी रहती है। शास्त्रों में बताया गया है कि यदि सड़क के किनारे पीपल का वृक्ष उग गया है तो उसे काटना नहीं चाहिए। इसके अलावा यदि नदी के किनारे पीपल का वृक्ष उग जाता है तो उसे भी नहीं काटना चाहिए।
इसके अलावा सार्वजनिक स्थल, शमशान घाट के आसपास पीपल का वृक्ष उद जाता है तो उसे कभी भी काटना नहीं चाहिए। यदि पीपल के वृक्ष को काटना बेहद जरुरी है तो पहले यह समझे की यदि पीपल के पत्तों की संख्या हजार से कम है तो उसे पौधे की श्रेणी में रखा जाएगा। यदि हजार से ज्यादा है तो वह वृक्ष होगा। हजार से अधिक पत्तों वाले पीपल को काटने के लिए सही विधि विधान का पालन करना बेहद जरुरी है।
पीपल को काटने से पहले अपने मन में ही संकल्प लें कि यदि आप एक पीपल काट रहे हैं तो उसके बदले में आप कम से कम 10 पौधे जरुर लगाएंगे और उनका तब तक ध्यान रखेंगे की जब तक वह बड़े न हो जाएं।
यदि 1000 पत्तों से कम का पीपल का पेड़ है तो आप उसे काट सकते हैं। पानी की टंकी के आसपास कोई पीपल का पेड़ उग जाता है तो आप उसे चाहें तो निकाल सकते हैं। छत आदि पर उगे पीपल के पेड़ को भी काट सकते हैं।
इस बात का ध्यान रखें कि यदि 100 से अधिक पत्तों वाले वृक्ष को काटना है तो एक रात पहले वहां जाकर दीपक जलाएं और वहां थोड़ा प्रसाद चढ़ाएं।
इसके बाद हाथ जोड़कर प्रार्थना करें की यहां जो भी देवी देवता हैं वह कृप्या करके परिवर्तित हो जाए। इसके आलावा 108 पाठ विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें।
