लखनऊ: इस साल का आखिरी चंद्र ग्रहण शरद पूर्णिमा पर शनिवार रात लगेगा। यह पूरे देश में दिखाई पड़ेगा। ग्रहण रात 1:05 बजे से 2:24 बजे तक रहेगा। इसके शुरू होने से 9 घंटे पहले शाम 4:05 बजे से सूतक काल शुरू हो जाएगा। शरद पूर्णिमा की रात चांद की रोशनी में खीर रखने और अगले दिन इसके सेवन की प्रथा है, लेकिन इस बार चांदनी रात में खीर रखना आसान नहीं होगा। लोग रात 2:24 बजे ग्रहण के मोक्ष के बाद ही खीर रख सकेंगे, लेकिन इससे पहले घर को पानी से धोने के साथ खुद भी स्नान करना होगा।
अलीगंज स्थित स्वास्तिक ज्योतिष केंद्र के आचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि हर साल आश्विन मास की पूर्णिमा पर शरद पूर्णिमा मनाई जाती है। इस साल का आखिरी चंद्रग्रहण इसी दिन लगेगा। उन्होंने बताया कि पूर्णिमा तिथि 28 अक्टूबर की सुबह 4:17 बजे से रात 1:53 बजे तक रहेगी। इसी दौरान रात 1:05 बजे चंद्रग्रहण की शुरुआत होगी। इसका मध्य काल रात 1:44 बजे होगा और मोक्ष रात्रि 2:24 बजे होगा। यूपी संस्कृत संस्थान के पूर्व प्रशिक्षक रहे पं. अनिल कुमार पाण्डेय ने बताया कि ग्रहण के मोक्ष के बाद ही लोग खीर रख सकेंगे। वहीं, छांछी कुआं हनुमान मंदिर के महंत अंजनी दास ने बताया कि ग्रहण के कारण मंदिर शनिवार दोपहर 12 बजे बंद हो जाएगा और अगले दिन भोर में धुलाई के बाद सुबह 6:30 बजे खुलेगा। ग्रहण के कारण और कोई कार्यक्रम नहीं हो सकेगा।
अश्विनी नक्षत्र और मेष राशि में लगेगा ग्रहण
आचार्य नागपाल ने बताया कि चंद्रग्रहण अश्विनी नक्षत्र और मेष राशि में लग रहा है। इसका सूतक काल 4:05 बजे शुरू हो जाएगा। सूतक के समय मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं।
ग्रहण काल में वर्जित काम
- गर्भवतियों को ग्रहण नहीं देखना चाहिए।
- ग्रहण काल में कैंची, सूई, चाकू या धारदार चीजों का इस्तेमाल न करें।
- ग्रहण के दौरान भगवान की मूर्ति का स्पर्श नहीं करना चाहिए।
खाने में तुलसी डालें
- सूतक काल शुरू होने से पहले खाने पीने की चीजों में तुलसी के पत्ते डाल दें।
- खाद्य पदार्थ में कुश भी डाल सकते हैं।
- ग्रहण के दौरान भगवान का ध्यान, गुरु मंत्र, राहु व चंद्रमा के मंत्रों का जप कर सकते हैं।
ग्रहण के बाद दान-पुण्य, स्नान और ईष्ट देव के मंत्रों का जाप करें।
ग्रहण का असर
- चंद्र ग्रहण से कहीं प्रकृति-प्रकोप, दुर्भिक्ष भय, भूकंप से जन-धन की हानि आशंका भी रहेगी।
- चीन, इरान, ईराक, अफगानिस्तान समेत कई देशों में अशांति, भूकंप जैसी घटनाएं होने का भी अंदेशा रहेगा।
- चंद्रग्रहण के असर से वृषभ, मिथुन, कन्या, धनु और मकर राशि के जातकों को लाभ होगा।
मई में लगा था पहला चंद्रग्रहण
5 मई को साल 2023 का पहला चंद्र ग्रहण लगा था। यह रात 8 बजकर 44 मिनट से शुरू होकर रात 1 बजकर 2 मिनट पर खत्म हुआ। हालांकि यह चंद्र ग्रहण भारत में नहीं दिखाई दिया। यह चंद्रग्रहण एशिया, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण पूर्वी यूरोप के कुछ भागों में दिखाई दिया।
चंद्र ग्रहण के समय पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच में आ जाती है। ऐसी स्थिति में जब पृथ्वी की छाया चंद्रमा की सतह पर पड़ती है तो चंद्रमा का वह भाग नहीं दिखाई देता। सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा की अलग-अलग दूरी और अंतरिक्ष में उनकी स्थिति के हिसाब से चंद्र ग्रहण भी पूर्ण और आंशिक होते हैं। जब पृथ्वी की छाया पूरे चंद्रमा को ढंक लेती है तो वह पूर्ण चंद्रग्रहण कहलाता है। लेकिन आज पूर्ण नहीं आंशिक चंद्रग्रहण है।
