रायपुर :- स्कूलों में छुट्टियां लग गई है, इस बीच कई बच्चे छोटा-मोटा काम करने लगते हैं. कुछ बच्चे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए काम करते हैं, तो कुछ अपनी खुद की जरूरतों को पूरा करने के लिए. लेकिन बच्चों की इस जरुरत का फायदा कुछ लोग उठाने लगते हैं.जो उन्हें कम वेतन देकर ज्यादा काम करवाते हैं.कई बार देखा गया है कि बच्चों से ऐसा काम भी करवाया जाता है जो वो करने में सक्षम नहीं होते हैं.इस दौरान श्रम कानून का पालन भी नहीं किया जाता है. जिनकी उम्र काम करने की नहीं होती है. फिर भी उन्हें काम पर रख लिया जाता हैं. इस तरह के मामले गर्मी की छुट्टियों में ज्यादा देखने को मिलते हैं. जिसकी सूचना छत्तीसगढ़ बाल संरक्षण आयोग को भी मिल रही थी, जिसके बाद आयोग ने इन मामलों को संज्ञान में लिया.
बाल श्रम कानून का सख्ती से होगा पालन : छत्तीसगढ़ में बाल श्रम कानून का सख्ती से पालन किया जाएगा. यदि कोई भी इसका उल्लंघन करते हुए पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. वहीं यदि श्रम करने वाले बालक की आर्थिक स्थिति सही नहीं है, या फिर उनके माता-पिता भरण पोषण करने में अक्षम है, तो उनके लिए कलेक्ट्रेट में एक उपार्जन खिड़की खोली जाएगी, जिससे उस बच्चे और उसके परिजनों को मदद मिलेगी. यह सर्कुलर छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की नव नियुक्त अध्यक्ष डॉ वर्णिका शर्मा ने जारी किया है.जिसके सख्ती से पालन के निर्देश दिए हैं.
बाल श्रम को लेकर लगातार खबरें आ रही है. इसी को संज्ञान में लेते हुए सभी जिलाधीश कार्यालय में एक सर्कुलर जारी किया गया है.जिसमें खास तौर पर कहा गया है कहीं भी कोई भी बालक श्रम करता हुआ ना दिखे. किसी भी प्रकार से उनके अधिकारों का हनन न हो. इसके लिए यदि टीम गठित की गई है, तो वह जांच के लिए लगातार जाएंगे. यदि किसी भी बच्चे के अधिकारों का हनन होता दिखाई देगा , उसके अधिकारों का हनन करने वाले पर कड़ी कार्यवाही की जाएगी- डॉ वर्णिका शर्मा, अध्यक्ष, राज्य बाल संरक्षण आयोग
वर्णिका शर्मा ने यह भी बताया कि सर्कुलर में एक बात और रखी गई है.जिसके तहत यदि किसी प्रकार से बच्चों के माता-पिता असहज महसूस कर रहे हैं.उनके पास जीविका का साधन नहीं है , या बच्चा खाने-पीने या फिर अपने भरण पोषण में अक्षम की स्थिति में है, तो उस स्थिति में कलेक्टोरेट में एक उपार्जन खिड़की की व्यवस्था की जाए, ऐसा आग्रह भी किया गया है.वर्णिका शर्मा ने बताया कि उपार्जन खिड़की से तात्पर्य है कि यदि बच्चे के परिजनों के पास कोई रोजगार का साधन नहीं है, यदि वह अपना भरण पोषण करने में अक्षम है तो उसे खिड़की के माध्यम से उनकी स्थिति को देखते हुए उनके भरण पोषण से संबंधित रोजगार संबंधी कुछ व्यवस्थाएं की जाएगी.