नई दिल्ली, 30 जनवरी । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि देश में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, पंडित मदन मोहन मालवीय, महर्षि अरविंद और राजा महेंद्र प्रताप सिंह जैसी विभूतियों ने जो योगदान दिया था उससे लोग आज भी प्रेरित हो रहे हैं और शिक्षा के लिए अपना योगदान दे रहे हैं।
श्री मोदी ने रविवार को रेडियो पर प्रसारित अपने मासिक कार्यक्रम ‘मन की बात’ में कहा कि आजादी के दौरान हमारे महापुरुषों ने शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए एक के बाद एक केंद्र स्थापित किए और उनकी प्रेरणा से शिक्षा के विस्तार के लिए लोग आज भी आगे आ रहे हैं। यही वह प्रेरणा है जिसके कारण के पूर्व छात्र जय चौधरी ने आईआईटी बीएचयू फाउंडेशन को साढ़े सात करोड़ रुपए से ज्यादा का सहयोग दिया और तमिलनाडु में नारियल बेच कर जीवन यापन करने वाली तायम्मल ने स्कूल खुलवाने के लिए एक लाख रुपए का योगदान दिया।
उन्होंने कहा कि भारत शिक्षा और ज्ञान की तपो-भूमि रहा है। हमने शिक्षा को किताबी ज्ञान तक तक ही सीमित नहीं रखा बल्कि इसे जीवन के एक समग्र अनुभव के तौर पर देखा है और यही वजह है कि हमारी महान विभूतियों का भी शिक्षा से गहरा नाता रहा। पंडित मदन मोहन मालवीय ने जहां बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना की, महात्मा गांधी ने, गुजरात विद्यापीठ के निर्माण में अहम भूमिका निभाई, गुजरात के आणंद में सरदार पटेल के आग्रह पर उनके दो सहयोगियों, भाई काका और भीखा भाई ने वहां य शिक्षा केंद्र खोले, पश्चिम बंगाल में रविन्द्र नाथ ठाकुर ने शान्ति निकेतन की स्थापना की तो महाराजा गायकवाड़ ने भी कई शिक्षण संस्थानों का निर्माण करवाया। डॉ. अम्बेकर और श्री अरविन्द घोष ने उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित किया। राजा महेंद्र प्रताप सिंह ने शिक्षण संस्थान कि स्थापना के लिए अपना घर ही सौंप दिया था। उन्होंने अलीगढ़ और मथुरा में शिक्षा केंद्रों के निर्माण के लिए खूब आर्थिक मदद की।
प्रधानमंत्री ने कहा,“कुछ समय पहले मुझे अलीगढ़ में उनके नाम पर एक विश्वविद्यालय की आधारशिला रखने का भी सौभाग्य प्राप्त हुआ। मुझे खुशी है कि शिक्षा के प्रकाश को जन-जन तक पहुंचाने की वही जीवंत भावना भारत में आज भी कायम है।”
उन्होंने कहा कि इन्हीं महापुरूषों की प्रेरणा है जिसके कारण तमिलनाडु के त्रिप्पुर जिले के उदुमलपेट ब्लॉक में रहने वाली तायम्मल के पास अपनी कोई जमीन नहीं है। बरसों से इनका परिवार नारियल पानी बेचकर अपना गुजर-बसर कर रहा है। उन्होंने कमजोर आर्थिक स्थिति के बावजूद अपने बेटे-बेटी को पढ़ाने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी थी। उनके बच्चे चिन्नवीरमपट्टी पंचायत में पढ़ते थे तो एक दिन स्कूल मे कक्षाओं और स्कूल की स्थिति को सुधारने की ब्बत उठी तो तायम्मल ने एक लाख रुपये स्कूल के लिए दान कर दिए। ऐसा करने के लिए बहुत बड़ा दिल और सेवा-भाव चाहिए।
श्री मोदी ने कहा,“शिक्षा को लेकर इसी तरह के दान के बारे में भी पता चला है कि बी एच यू के पूर्व छात्र जय चौधरी ने आईआईटी बीएचयू फाउंडेशन के लिए करीब साढ़े सात करोड़ रुपए का दान दिया।”
प्रधानमंत्री के मन की बात की 10 बड़ी बातें
- मन की बात संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “राजा महेंद्र प्रताप सिंह ने एक टेक्निकल स्कूल की स्थापना के लिए अपना घर ही सौंप दिया था। उन्होंने अलीगढ़ और मथुरा में शिक्षा केंद्रों के निर्माण के लिए खूब आर्थिक मदद की।”
- मुझे खुशी है कि शिक्षा के प्रकाश को जन-जन तक पहुंचाने की वही जीवंत भावना भारत में आज भी कायम है। क्या आप जानते हैं कि इस भावना की सबसे सुन्दर बात क्या है ? वो ये है कि शिक्षा को लेकर ये जागरूकता समाज में हर स्तर पर दिख रही है।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश में अभी पद्म सम्मान की भी घोषणा हुई है। पद्म पुरस्कार पाने वाले में कई ऐसे नाम भी हैं जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। ये हमारे देश के गुमनाम हीरो हैं, जिन्होंने साधारण परिस्थितियों में असाधारण काम किए हैं।
- पीएम मोदी ने कहा, “जैसे कि, उत्तराखंड की बसंती देवी जी को पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। बसंती देवी ने अपना पूरा जीवन संघर्षों के बीच जीया।”
- इसी तरह मणिपुर की 77 साल की लौरेम्बम बीनो देवी दशकों से मणिपुर की Liba textile art का संरक्षण कर रही हैं। उन्हें भी पद्मश्री से सम्मानित किया गया है।”
- कोरोना की नई wave से भारत बहुत सफलता के साथ लड़ रहा है ये भी गर्व की बात है कि अब तक करीब-करीब साढ़े चार करोड़ बच्चों ने कोरोना वैक्सीन की डोज ले ली है। इसका मतलब ये हुआ, कि 15 से 18 साल की आयु-वर्ग के लगभग 60 प्रतिशत युवाओं ने तीन से चार हफ्ते में ही टीके लगवा लिए हैं।
- हमें भी पूरी जिम्मेदारी के साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत को खुद अपने जीवन का हिस्सा बनाते हुए सब लोगों तक पहुँचाने का प्रयास करना चाहिए। हमारी संस्कृति, हमारे लिए ही नहीं, बल्कि, पूरी दुनिया के लिए एक अनमोल धरोहर है। दुनिया भर के लोग उसे जानना चाहते हैं, समझना चाहते हैं, जीना चाहते हैं।
- इस वर्ष, आर्मी डे पर घोड़े विराट को सेना प्रमुख द्वारा COAS Commendation Card भी दिया गया। विराट की विराट सेवाओं को देखते हुए, उसकी सेवा-निवृत्ति के बाद उतने ही भव्य तरीक़े से उसे विदाई दी गई। घोड़ा विराट, 2003 में राष्ट्रपति भवन आया था और हर बार गणतंत्र दिवस पर Commandant charger के तौर पर परेड को Lead करता था।
- जब किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष का राष्ट्रपति भवन में स्वागत होता था, तब भी, वो, अपनी ये भूमिका निभाता था। ऐसा ही एक दृश्य हमें इस बार गणतंत्र दिवस की परेड में भी देखने को मिला। इस परेड में President’s Bodyguards के चार्जर घोड़े विराट ने अपनी आख़िरी परेड में हिस्सा लिया।
- पीएम मोदी ने कहा कि भारत शिक्षा और ज्ञान की तपो-भूमि रहा है। हमने शिक्षा को किताबी ज्ञान तक तक ही सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे जीवन के एक समग्र अनुभव के तौर पर देखा है।