रायपुर :- छत्तीसगढ़ में कृषि को लेकर रोजाना नए प्रयोग हो रहे हैं. इस क्षेत्र अब तक 300 से ज्यादा स्टार्टअप हैं.इसमें सबसे ज्यादा पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट, सप्लाई चैन और फार्म मशीनरी के क्षेत्र से जुड़े हैं. इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में लगभग 300 स्टार्टअप काम कर रहे हैं. जिसमें से 119 स्टार्टअप को फंडिंग भी की गई है. जो राशि लगभग 13 करोड़ रूपये की है. इन स्टार्टअप ने अपने उपक्रमों के माध्यम से प्रत्यक्ष रूप से 1 हजार रोजगार का सृजन किया है. अप्रत्यक्ष रूप से 5 हजार रोजगार का सृजन किया है. स्टार्टअप न केवल नवाचारी समाधान बनाता है बल्कि अर्थव्यवस्था में रोजगार सृजन भी कर रहे हैं.
प्रदेश में 70 फीसदी कृषि से जुड़े स्टार्टअप :
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के आर एबीआई हेड एंड सीईओ डॉक्टर हुलास पाठक ने इस बारे में विस्तार से जानकारी दी. कृषि के क्षेत्र में 300 से ज्यादा स्टार्टअप शुरू किए गए हैं. जिसमें 70% स्टार्टअप छत्तीसगढ़ में चल रहे हैं. स्टार्टअप में कृषि के अलग-अलग क्षेत्र हैं. जिसमें फसल प्रबंधन, फसल उत्पादन, सप्लाई चैन मैनेजमेंट. जैविक खेती फार्मा मशीनरी का क्षेत्र हो फॉरेस्ट हॉर्टिकल्चर जैसे सेक्टर में स्टार्टअप कम कर रहे हैं. जिसमें प्रमुख रूप से सबसे ज्यादा स्टार्टअप पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट, सप्लाई चैन और फार्म मशीनरी के क्षेत्र में स्टार्टअप के क्षेत्र में हैं. स्टार्टअप को कृषि या फिर किसी समस्या का समाधान करने का मतलब यह नहीं समझा जाता बल्कि अर्थव्यवस्था में एक ऐसा इंटरवेंशन भी समझते हैं कि जहां पर हम किस तरीके से हम रोजगार का सृजन कर सकते हैं.
युवा उद्यमियों को आगे लाने का प्लान :
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में आरकेवीआई रफ्तार जिसे हम आईजीकेवी के नाम से जानते हैं. इसकी शुरुआत 6 साल पहले हुई है. यह केंद्र भारत सरकार के किसान मंत्रालय द्वारा समर्थित है. ऐसे युवा साथी या आकांक्षी उद्यमी जो कृषि के क्षेत्र में अलग-अलग समस्याओं का समाधान चाहते हैं. चाहे वह उत्पादन की समस्या हो, फसल प्रबंधन की समस्या हो, चाहे वह ई-कॉमर्स की बात हो, चाहे वह पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट की बात हो, चाहे वह सप्लाई चैन मैनेजमेंट की बात हो. इस तरह से अलग-अलग क्षेत्रों में नवाचार (स्टार्टअप) के माध्यम से इन क्रियाकलापों को हम बेहतर तरीके से कैसे कर सकते हैं और उसे उद्यम के रूप में कैसे स्थापित कर सकते हैं. इस केंद्र के माध्यम से तकनीकी सहायता के साथ ही व्यवसायिक और वित्तीय सहायता भी दी जाती है.
डॉ हुलास पाठक के मुताबिक कृषि में सबसे बड़ी समस्या है कि उत्पादन के बाद हम उपज का प्रबंध कैसे करें. स्थाई रूप से इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी होने के कारण कई बार ऐसा होता है, वह नष्ट हो जाता है. तो बहुत सारे स्टार्टअप अपने नए-नए तरीके से पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट को लेकर स्टार्टअप ला रहे हैं. सप्लाई चैन मैनेजमेंट उत्पादन या उपज को किसान के खेत से उपभोक्ता तक कैसे पहुंचाया जाए. इसके साथ ही किसान के खेत में लगने वाले संसाधन चाहे वह केमिकल हो मशीनरी हो या फिर दूसरी अन्य कोई भी चीज हो. इनको फैक्ट्री से किसान के खेत तक कैसे पहुंचाया जाए. इन दोनों स्थिति में सप्लाई चैन मैनेजमेंट के माध्यम से बिचौलियों की संख्या कम हो सके और किसानों को उसकी उपज का सही कीमत मिल सके.