जोशीमठ। जोशीमठ पर लोगों द्वारा फैलाई जा रहीं अब अफवाहों को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चिंता जाहिर की है। इस बीच आईआईटी कानपुर के भू वैज्ञानिक प्रो. राजीव सिन्हा ने एक नया खुलासा किया है। 2021 में चमोली में आई आपदा के बाद उत्तराखंड क्षेत्र में ड्रोन सर्वे कर चुके प्रो. सिन्हा ने आगाह किया कि चूंकि जोशीमठ भूस्खलन के मलबे पर बसा है, जो भूर्गभ में पानी का सतह पर दबाव बनने पर धीरे-धीरे खिसक रहा है।
जोशीमठ भूस्खलन और भू-धंसाव से प्रभावित क्षेत्र में है, इसका कारण यहां आने वाले हल्के भूकंप हैं। वहीं, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ रिमोट सेंसिंग (आईआईआरएस) ने करीब दो साल की सेटेलाइट तस्वीरों का अध्ययन करने के बाद सरकार को एक रिपोर्ट दी है। इसके अनुसार, जोशीमठ हर साल 6.62 सेंटीमीटर यानी करीब 2.60 इंच धंस रहा है। आईआईआरएस देहरादून के वैज्ञानिकों ने जुलाई 2020 से मार्च 2022 के बीच जोशीमठ और आसपास के करीब 6 किलोमीटर क्षेत्र की सेटेलाइट तस्वीरों का अध्ययन किया। पढ़िए पूरी डिटेल्स…
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 8 जनवरी को कहा था कि यहां सभी बड़े प्रोजेक्ट रोक दिए गए हैं, जोशीमठ से करीब 3 किमी दूर सड़क बनाने के लिए पहाड़ों पर ड्रिलिंग जारी है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को आपदा प्रभावित जोशीमठ कस्बे का दौरा किया और प्रभावित लोगों के लिए अंतरिम सहायता की घोषणा की।
स्थानीय लोगों ने बद्रीनाथ हादसे की तर्ज पर मुआवजे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया और डैमेज भवन गिराने की कार्रवाई नहीं होने दी।धामी ने जोशीमठ पहुंचने पर संवाददाताओं से कहा, “हम जोशीमठ के लोगों के साथ खड़े हैं। प्रधानमंत्री व्यक्तिगत रूप से स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। मुझे उनका पूरा समर्थन है। उनके (प्रभावित लोगों) हितों का ध्यान रखा जाएगा।” मुख्यमंत्री ने कहा कि बाजार दर के अनुसार मुआवजा दिया जाएगा, जो सभी हितधारकों को विश्वास में लेने के बाद तय किया जाएगा।