नई दिल्ली:- गरुण पुराण किसी भी जीव विशेष कर मनुष्य की मृत्यु एवं आत्मा संबंधी रहस्यों के बारे में बात करता है. जब किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है तो शरीर के किस अंग से आत्मा बाहर निकलती है इसे लेकर लोगों में काफी उत्सुकता होती है. गरुड़ पुराण बताता है कि शरीर के 9 द्वार हैं जिनमें से किसी एक द्वार से मृत्यु के समय आत्मा शरीर को छोड़ती है. आइए इस बारे में विस्तार से जानें.
कौन से नौ द्वार हैं
सबसे पहले जान लेते हैं कि शरीर के किन 9 द्वार से आत्मा देह से निकलती हैं. ये 9 द्वार हैं – मुख, दोनों आंखें, दोनों कान, नाक की दोनों छेद और शरीर के दोनों उत्सर्जन अंग. इन नौ में से किसी एक से ही अंतिम समय में आत्मा निकलती है.
कर्म के अनुसार निकते हैं प्राण
गरुड़ पुराण के अनुसार व्यक्ति के कर्मों के अनुसार ही अंतिम समय में उसके प्राण भी तय अंग से निकलते हैं. ध्यान दें कि किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर उसका मुख या आंखें खुली रह जाती हैं तो समझ लें कि उसके प्राण या मुख या आंखों से निकले हैं. गुरुड़ पुराण के अनुसार नाक से प्राण तब निकलते हैं जब व्यक्ति अपना पूरा जीवन भगवान की भक्ति में बिता देता है. इस तरह नाक से प्राणों का निकलना शुभ माना जाता है.
पापी व्यक्ति की आत्मा
स्वार्थी, लालची, काम वासना में लिप्त व्यक्ति के प्राण शरीर के उत्सर्जन अंग से निकलते हैं. इस तरह प्राणों का निकलना बहुत अशुभ माना गया है. पुराण में बताया गया है कि वो लोग जो मृत्यु के समय यम दूतों को देखकर घबरा जाते हैं, उनके प्राण नीचे सरकने लगते हैं और फिर मल या मूत्र के द्वार से प्राण वायु निकलने लगाते हैं. ये लोग मृत्यु के समय मल-मूत्र का त्याग भी करते हैं. ऐसे व्यक्तियों को यम दूत गले में पाश बांधकर यमलोक लेकर जाते हैं.
आंख से किन लोगों के निकलते हैं प्राण
गरुड़ पुराण की मानें तो जो लोग मोह माया में फंसे होते हैं, और जीने की इच्छा से भरे होते हैं उनके प्राण आंखों से निकलते हैं. यमराज के दूत ऐसे लोगों के प्राण बलपूर्वक ले जाते हैं. ऐसे में उनकी आंखों उलट हो जाती है. वहीं दो लोग मुख से प्राण छोड़के हैं वो सदा धर्म के मार्ग पर चलने वाले होते हैं. ऐसी आत्मा स्वर्ग को प्रस्थान करती है.
