प्रयागराज:- भारतीय महाकाव्य रामायण के अनुसार भगवान राम का संबंध भारत की उत्तर से लेकर दक्षिण तक कई स्थानों से रहा है. भगवान राम अपने 14 वर्ष के वनवास को काटने के लिए अयोध्या से निकले. उसके बाद वह कन्याकुमारी तक लगभग सभी राज्यों से गुजर कर श्रीलंका पहुंचे, जहां उन्होंने रावण का वध किया और वापस अयोध्या धाम पहुंचे थे. ऐसे में भगवान राम का प्रयागराज से भी विशेष संबंध रहा है.
प्रयागराज में इस दिन पहुंचे थे भगवान राम
पिता दशरथ के वचन पर भगवान राम पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ अयोध्या से 14 वर्ष का वनवास काटने के लिए अयोध्या की सीमा के बाहर निकल पड़े थे. वह चैत्र शुक्ल पक्ष में प्रयागराज की सीमा से पहले कौशांबी पहुंचे थे. वहां श्रृंगवेरपुर में मां गंगा का जलाभिषेक करते हुए प्रयागराज की तरफ निकले. गंगा के किनारे स्थित महर्षि भारद्वाज के आश्रम में जब वह पहुंचते हैं, तो वह दिन चैत्र शुक्ल पक्ष था.प्रयागराज विद्यवत परिषद के सदस्य डॉक्टर प्रभाकर त्रिपाठी लोकल 18 से बात करते हुए बताते हैं कि भारतीय संस्कृति और पंचांग के अनुसार भगवान राम चैत्र शुक्ल पक्ष में आज ही के दिन श्रृंगवेरपुर होते हुए महर्षि भारद्वाज आश्रम प्रयागराज पहुंचे थे. जहां से वनवास में कैसे समय बिताएं और कहां पर ठहरे इसका मार्गदर्शन भी प्राप्त किया था.
प्रयागराज से रहा है भगवान राम का नाता
अपने वनवास के दौरान भगवान राम प्रयागराज के विभिन्न स्थानों से होकर गुजरे थे, जिनमें से एक महर्षि भारद्वाज का आश्रम श्रृंगवेरपुर धाम प्रमुख है. वहीं मनकामेश्वर अक्षय वट वृक्ष का भी संबंध भगवान राम से रहा है. नैनी में एक तालाब के किनारे भगवान राम एक रात बिताये थे, जहां आज भी उनकी चरण पादुका की छाप रखी हुई है. तो वहीं यहां का प्राचीन मंदिर भी मौजूद है, जो इस तालाब के किनारे है और इसमें कछुआ को लोग खाना खिलाने आते हैं.
