नई दिल्ली:– सुप्रीम कोर्ट ने GST एक्ट के तहत होने वाली गिरफ्तारियों पर व्यापारियों को बड़ी राहत दी है. कोर्ट के मुताबिक कस्टम और जीएसटी एक्ट में होने वाली गिरफ्तारियों में व्यक्तियों के सीआरपीसी के तहत मिलने वाली सभी सुरक्षा मिलेगी. कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि कस्टम अधिकारी को पुलिस अधिकारी नहीं माना जा सकता.
जीएसटी एक्ट में होने वाली गिरफ्तारियों पर राहत का एलान- सुप्रीम कोर्ट ने सभी व्यापारियों को राहत दी. पहले आपको बता दें कि ये मामला क्या है? दरअसल जीएसटी एक्ट और कस्टम एक्ट के तहत गिरफ्तारी को चुनौती दी गई थी. कोर्ट में करीब 279 याचिकाएं दायर की गई थी.
इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सीआरपीसी के तहत मिलने वाली सभी सुरक्षा मिलेगी. गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत मिल सकेगी.
व्यापारी राहत के लिए कोर्ट में याचिका दे सकते है. कस्टम अधिकारी को पुलिस अधिकारी नहीं माना जा सकता.कोर्ट ने पिछले साल इस पर अपना आदेश सुरक्षित रखा था.
सुप्रीम कोर्ट ने माना कि सीआरपीसी, बीएनएसएस के तहत आरोपी को मिलने वाली सुरक्षा GST, सीमा शुल्क के तहत अभियोजन का सामना करने वालों को भी मिलेगी.
सुप्रीम कोर्ट ने माना कि GST, सीमा शुल्क के तहत अभियोजन का सामना करने वाले लोग अग्रिम जमानत मांग सकते हैं. यहां तक कि उन मामलों में भी जहां FIR दर्ज नहीं की गई है.
सुप्रीम कोर्ट GST, सीमा शुल्क अधिनियम के तहत गिरफ्तारी, अन्य दंडात्मक शक्तियों को चुनौती देने वाली 279 याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था.
क्या है GST एक्ट- GST एक्ट भारत में इनडायरेक्ट टैक्स सिस्टम को सरल और एकीकृत करने के लिए लागू किया गया एक कानून है.
इसे 1 जुलाई 2017 को पूरे देश में लागू किया गया था. यह एक “One Nation, One Tax” सिस्टम है, जिसका मतलब है कि पूरे देश में सामान और सेवाओं पर एक समान कर लागू होगा.
GST एक्ट के तहत किसी को कभी गिरफ्तार किया जा सकता है? नहीं, GST अधिनियम, 2017 के तहत किसी व्यक्ति को कभी भी गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है.
गिरफ्तारी के लिए कुछ विशेष परिस्थितियांं और कानूनी प्रक्रियाएं होती हैं, जिन्हें पूरा किए बिना किसी व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता.
GST अधिनियम में गंभीर कर चोरी, फर्जी बिलिंग या सरकार को नुकसान पहुंचाने वाले मामलों में ही गिरफ्तारी का प्रावधान है.
किसी को बिना जांच, बिना नोटिस या मनमाने ढंग से गिरफ्तार नहीं किया जा सकता. अगर कोई व्यक्ति निर्दोष है और जांच में सहयोग कर रहा है, तो उसे गिरफ्तार करने की संभावना बहुत कम होती है.
