महाराष्ट्र सरकार ने 10वीं कक्षा के छात्रों को एक नई नीति के तहत प्रमोट करने का निर्णय लिया है, जिससे वे साइंस और मैथ्स में फेल होने के बावजूद 11वीं कक्षा में जा सकेंगे. यह जानकारी राज्य के स्कूल शिक्षा के लिए करिकुलम फ्रेमवर्क (SCF-SE) के तहत दी गई है.
नई नीति के अनुसार, यदि छात्रों को साइंस और मैथ्स में न्यूनतम 20 अंक मिलते हैं, तो वे अगली कक्षा में प्रमोट किए जाएंगे. इसका मुख्य उद्देश्य स्कूल ड्रॉपआउट रेट को कम करना और छात्रों के लिए शिक्षा प्रणाली को अधिक लचीला बनाना है. इससे छात्रों को जिन विषयों में कमजोर प्रदर्शन हो रहा है, उन्हें अन्य विषयों के साथ आगे बढ़ने का मौका मिलेगा
हालांकि यह नीति केवल मैथ्स और साइंस के लिए लागू होगी और अन्य विषयों पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा. इसके अलावा छात्रों को अपने अंक सुधारने के लिए दोबारा परीक्षा देने का भी अवसर दिया जाएगा. इस निर्णय को लेकर कई विवाद उठ रहे हैं. कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की नीति से शिक्षा का स्तर गिर सकता है. उनका तर्क है कि इससे छात्रों में प्रतिस्पर्धा की भावना कम होगी, जिससे वे अपने अंक से संतुष्ट होकर मेहनत करने से बच सकते हैं
छात्रों के भविष्य पर प्रभावइसके अलावा इस नीति का प्रभाव छात्रों के भविष्य पर भी पड़ सकता है, क्योंकि मैथ्स और साइंस जैसे महत्वपूर्ण विषयों को लेकर एक गलत संदेश जाएगा. इस स्थिति में छात्रों का इन विषयों के प्रति गंभीरता कम हो सकती है, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है.अंक सुधार के लिए अवसरइस नई नीति के तहत छात्रों को उनके अंक सुधारने के लिए और अधिक अवसर दिए जाने की बात की गई है. आगे यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह कदम वास्तव में छात्रों के लिए फायदेमंद साबित होता है या नहीं
