नई दिल्ली:– देश के सात राज्य मध्यप्रदेश उत्तर प्रदेश, झारखंड, बिहार, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और राजस्थान अगर संयुक्त रूप से प्रयास करें, तो देश में बाघ संरक्षण के प्रयास और बेहतर हो सकते हैं। शिकार की घटनाएं थम सकती हैं।
दरअसल, इन राज्यों में बाघों का कॉरिडोर है। 5 राज्यों के सबसे ज्यादा संरक्षित क्षेत्र हैं। ये इतने नजदीक हैं कि बाघ एक से दूसरे राज्य में घूमते हैं। करीब 30 हजार वर्ग किमी के इस क्षेत्र में संरक्षण के सशक्त प्रयास करने की जरूरत है। इस क्षेत्र में मध्य प्रदेश के बांधवगढ़, संजय दुबरी, छत्तीसगढ़ का गुरु घासीदास अभयारण्य, झारखंड का पलामु टाइगर रिजर्व, बिहार का रोहताश अभयारण्य आता है। जिनके बीच में बेहतर कॉरिडोर है, जो बाघ आबादी बढ़ाने के लिए बेहतर जगह बन सकती है।
बाघ संरक्षण पर चर्चा
से बाघ संरक्षण पर चर्चा करते हुए वन्य प्राणी विशेषज्ञों ने कहा कि, यदि इन राज्यों की एक संयुक्त फोर्स बनाई जाए तो शिकार की घटनाएं भी रुक सकती है। बता दें की मध्य प्रदेश में पिछले पांच साल में 168 से अधिक बाघों की मौत हो चुकी है। वहीं देशभर में 607 मौतें हुई है।
इस वर्ष छह माह में ही देश भर में 75 बाघों की मौत हुई है। इनमें अधिकांश प्रकरण बाघ के शिकार के है। मध्य प्रदेश में बाघ के शिकार में अंतरराष्ट्रीय गिरोह के सक्रिय होने की बात भी सामने आई है। वहीं पांच साल में मप्र में 2,28,812 वन अपराध के प्रकरण दर्ज किए गए हैं।
कारगर साबित होगी राज्यों की संयुक्त पहल
राज्य सरकारें चाहें तो बाघों के शिकार पर अंकुश लगाने के लिए सीमावर्ती राज्यों के साथ मिलकर संयुक्त रणनीति तैयार की जा सकती हैं। सेवानिवृत्त IFS जसबीर सिंह चौहान कहते हैं कि जब वह मध्य प्रदेश के मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक थे तो उन्होंने सीमावर्ती राज्यों की संयुक्त टीम बनाकर शिकार रोकने की पहल भी की थी।
वह सीमावर्ती राज्यों जैसे छत्तीसगढ़ तथा महाराष्ट्र में अपने समकक्ष अधिकारियों के साथ बैठक कर रणनीति तय करते थे। सीमावर्ती राज्य के अधिकारियों के साथ वन और वन्यप्राणी अपराधों के विषय में सूचनाओं का आदान प्रदान हो। संवेदनशील क्षेत्रों में संयुक्त गश्त करें।
वर्तमान में यह व्यवस्था कुछ क्षेत्रों तक सीमित है, लेकिन इसे और विस्तृत रूप देने की आवश्यकता है। जसबीर सिंह चौहान यह मानते हैं कि राज्य सरकार इस ओर पहल कर पड़ोसी राज्यों के साथ संयुक्त प्लान बनाकर कार्य करें तो बाघों के शिकार की घटनाओं में काफी हद तक अंकुश लगाया जा सकता है।
इनके अलावा हाल ही में सेवानिवृत्त हुए वन्यप्राणी अभिरक्षक अतुल श्रीवास्तव का भी कहना है कि राज्यों के संयुक्त प्रयास से बाघों का संरक्षण और बेहतर तरीके से किया जा सकता है।
