नई दिल्ली :– एक तरफ जहां भारत में दिग्गज बिजनेसमैन के द्वारा हफ्ते में 90 घंटे, 70 घंटे तक काम करने की वकालत की जा रही है। वहीं दूसरी ओर ब्रिटेन की 200 कंपनियों ने एक बड़ा फैसला लिया है। इस फैसले के अंतर्गत, कर्मचारियों को सिर्फ 4 दिनों तक ही काम करना होगा और 3 दिनों तक छुट्टी दी जाएगी। कंपनियों के इस कदम से वर्क लाइफ बैलेंस को सुधारने और कर्मचारियों की संतुष्टि के लिए उठाया गया है। इस नई पॉलिसी का सीधा लाभ 5,000 से ज्यादा कर्मचारियों को मिल सकता है, जो अलग-अलग सेक्टरों में काम करते हैं। ये सेक्टर मार्केटिंग, टेक्नोलॉजी और चैरिटी से जुड़े होंगे
कंपनियों के द्वारा ये फैसला लेने का प्रमुख उद्देश्य कर्मचारियों के लाइफ की क्वालिटी को सुधारना है। 4 दिन का काम हफ्ते अपनाने वाली कंपनियों का मानना है कि ये पुरानी इकोनॉमिक स्क्रचर से बाहर निकालने का एक तरीका है। कुछ मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, फाउंडेशन कैम्पैन के डायरेक्टर जोई राइल ने कहा है कि 9 टू 5 का वर्क पैटर्न 100 साल पहले बनाया गया था और अब इस मॉडर्न टाइम के लिए ये सही नहीं है। उन्होंने आगे कहा है कि इस बदलाव से एम्पॉलीयस को 50 प्रतिशत से ज्यादा का फ्री टाइम मिलेगा, जिसके कारण वो खुशहाल और संतुष्ट जीवन जी पाएंगे।
सैलरी में नहीं होगी कटौती
सबसे खास बात तो ये है कि काम के दिन कम करने के बाद भी कर्मचारियों की सैलरी में किसी भी प्रकार की कोई कटौती नहीं की जाने वाली है। इसके कारण कर्मचारियों बिना किसी फाइनेंशियल स्ट्रेस के अपने काम पर ध्यान देने का अवसर मिलेगा। इन कंपनियों ने इस नीति को लागू करने के लिए बेहद गंभीरता से सोचा है, जिससे ना सिर्फ कर्मचारी बल्कि कंपनियों को भी फायदा होगा।
इंडियन बिजनेसमैन को मिला जवाब
ब्रिटेन की इन 200 कंपनियों के फैसले का सीधा असर ग्लोबल संदर्भ में भी महत्व रखता है, खासकर तब जब भारत में कुछ कंपनियां अपने कर्मचारियों से 70 से 90 घंटे काम करने की उम्मीद कर रही हैं। ब्रिटेन का ये कदम ना सिर्फ कर्मचारियों के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि ये बाकी देशों के लिए भी एक उदाहरण पेश करने जा रहा है कि वर्क लाइफ बैलेंस को कैसे प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
