यूपी:– बोर्ड 10वीं और 12वीं के रिजल्ट का इंतजार कर रहे छात्रों के मन में एक सवाल जरूर घूम रहा है कि अगर नंबर उम्मीद से कम आए तो क्या करें? घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि बोर्ड छात्रों को कई ऐसे विकल्प देता है जिनकी मदद से वे अपने अंकों के सुधार सकते हैं। आइए विस्तार से जानें..
यूपी बोर्ड रिजल्ट 2025 का सभी छात्रों को बेसब्री से इंतजार है, लेकिन इस बीच बहुत से छात्रों के मन में यह भी चिंता है कि अगर परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा तो आगे क्या होगा? क्या करियर की रफ्तार रुक जाएगी? दरअसल, कम अंक आने का मतलब यह बिल्कुल नहीं कि आपके पास कोई विकल्प नहीं है।
यूपी बोर्ड छात्रों को ऐसे कई मौके देता है, जिनसे वे अपने अंकों को सुधार सकते हैं या किसी अन्य रास्ते से आगे की पढ़ाई और करियर की योजना बना सकते हैं। आइए जानते हैं, अगर आपको उम्मीद से कम नंबर मिलते हैं, तो आप क्या कर सकते हैं।
स्क्रूटनी या पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन करें
अगर किसी छात्र को लगता है कि किसी विषय में उसे अपेक्षा से कम अंक मिले हैं या उसकी कॉपी की जांच में कोई गलती हुई है, तो वह स्क्रूटनी यानी पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन कर सकता है। इस प्रक्रिया में उस विषय की उत्तरपुस्तिका को दोबारा जांचा जाता है, ताकि यह देखा जा सके कि किसी उत्तर को छोड़ा तो नहीं गया, अंक सही जोड़े गए हैं या नहीं, और मूल्यांकन ठीक से हुआ है या नहीं। इसके लिए बोर्ड प्रति विषय एक निर्धारित शुल्क लेता है, जो आमतौर पर 500 रुपये के आस-पास होता है। यह आवेदन रिजल्ट जारी होने के कुछ दिनों बाद शुरू होता है।
कम्पार्टमेंट परीक्षा का विकल्प
यदि कोई छात्र एक या दो विषयों में फेल हो जाता है, तो उसे साल बर्बाद करने की जरूरत नहीं होती। यूपी बोर्ड ऐसे छात्रों को कम्पार्टमेंट परीक्षा देने का मौका देता है। यह परीक्षा कुछ महीनों बाद आयोजित की जाती है और इसमें छात्र उन्हीं विषयों की परीक्षा देते हैं जिनमें वे फेल हुए थे।
अगर छात्र इस परीक्षा को पास कर लेता है, तो उसे उसी वर्ष पास माना जाता है और उसकी अंकतालिका में पास लिखा जाता है। यह विकल्प छात्रों के लिए राहतभरा होता है, क्योंकि वे अगले साल तक इंतजार किए बिना ही अपना साल बचा सकते हैं।
ग्रेस मार्क्स सिस्टम
ग्रेस मार्क्स का उद्देश्य छात्रों को थोड़े से अंक कम होने पर पास करने का अवसर देना है। यदि कोई छात्र किसी विषय में पास होने के लिए जरूरी अंक (जैसे 33 अंक) से कुछ अंक कम प्राप्त करता है, तो उसे बोर्ड की तरफ से कुछ अतिरिक्त अंक मिल सकते हैं, जिससे वह पास हो सकता है।
उदाहरण के तौर पर, यदि किसी छात्र ने 31 या 32 अंक प्राप्त किए हैं और पास होने के लिए 33 अंक चाहिए, तो उसे ग्रेस मार्क्स देकर पास घोषित किया जा सकता है। यह प्रक्रिया बोर्ड की नीतियों और शर्तों के तहत की जाती है।
अगली बार दोबारा परीक्षा देने का विकल्प
यदि छात्र किसी कारण से पूरी तरह से फेल हो गया है या वह अपने अंकों से संतुष्ट नहीं है, तो वह अगले साल दोबारा परीक्षा में बैठ सकता है। इस विकल्प को री-अपीयर या इम्प्रूवमेंट परीक्षा भी कहा जाता है। इसमें छात्र पूरी तैयारी के साथ फिर से परीक्षा देकर बेहतर अंक प्राप्त करने की कोशिश कर सकता है।
यह विकल्प उन छात्रों के लिए उपयोगी होता है जो उच्च शिक्षा या किसी प्रतियोगी परीक्षा के लिए अच्छे अंकों की आवश्यकता महसूस करते हैं और अपने प्रदर्शन में सुधार करना चाहते हैं।
