दंतेवाड़ा :- दंतेश्वरी माई की नगरी दंतेवाड़ा में विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक फागुन मंडई 5 मार्च के दिन कलश स्थापना के साथ शुरूआत होने जा रही है. इसके लिए दंतेश्वरी टेंपल कमेटी ने तैयारी शुरू सकर दी है.
हजारों देवी देवताओं के आने की संभावना : दंतेश्वरी मंदिर के पुजारी विजेंद्र नाथ जीया ने बताया कि साल 2025 के फागुन मंडई में लगभग 45 लाख खर्च होने का अनुमान है. फागुन मंडई में शिकार नृत्यों की रोचक प्रस्तुति होती है. इसे आखेट नवरात्र के नाम से भी जाना जाता है. इसमें गौर मार जैसी कई रश्म दिखाई जाती है, जो बाहर से आए नृत्य दल प्रस्तुत करते हैं.
इस बार फागुन मेले में 1200 हजार से ज्यादा देवी देवता आने की संभावना है. इसके लिए न्यौता भी दिया जा चुका है. बस्तर के साथ ही पड़ोसी राज्य ओडिशा से भी देवी देवता के साथ वहां के पुजारी दंतेवाड़ा पहुंचेंगे. टेंपल कमेटी ने इसके लिए पूरे प्रबंध किए हैं, ताकि बाहर से आने वाले देवी देवताओं का स्थान सुनिश्चित किया जा सके : विजेंद्र नाथ जिया, पुजारी, दंतेश्वरी मंदिर
देश-विदेश से दंतेवाड़ा पहुंचते हैं पर्यटक : फागुन मंडई देखने देश-विदेश से पर्यटक दंतेवाड़ा पहुंचते हैं. फाल्गुन मंडई के अलावा पर्यटक आसपास के पर्यटन स्थलों का भी भ्रमण करते हैं. जिला प्रशासन पर्यटकों के लिए उचित व्यवस्था भी करती है. गाइड के जरिए पर्यटकों को पर्यटन स्थल घूमाने का उचित प्रबंध किया गया है. फागुन मेले की हर रस्म देखने के लिए यहां आए पर्यटक उत्सुक रहते हैं. हर साल पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है.
फागुन मंडई का शेड्यूल : फागुन मंडई के लिए जारी कार्यक्रम के मुताबिक, 5 मार्च को दंतेश्वरी मांई की प्रथम पालकी निकलेगी. फागुन मेले में कलश स्थापना के साथ इसी दिन प्रथम पालकी निकाली जाती है. बड़े मेले के दिन बस्तर राज परिवार के सदस्य कमलचन्द्र भंजदेव नगर का भ्रमण करते हैं. फागुन मंडई में 5 मार्च को प्रथम पालकी ताड़ फलंगा धोनी की रस्म होगी. अत में 15 मार्च को आमंत्रित देवी-देवताओं की विदाई के साथ फागुन मंडई का समापन होगा.
फागुन मंडई की रस्मों का शेड्यूल :
5 मार्च – प्रथम पालकी ताड़ फलंगा धोनी की रस्म,
6 मार्च – खोर खुदनी,
7 मार्च – नाच मांडणी,
8 मार्च – लम्हामार,
9 मार्च – कोडरिमार,
10 मार्च – चितलमार,
11 मार्च – गंवर मार,
12 मार्च – बड़ा मेला,
13 मार्च – आंवरामार,
14 मार्च – रंग भंग पादुका पूजन की रस्म,
15 मार्च – आमंत्रित देवी-देवताओं की विदाई के साथ फागुन मंडई का समापन.