दंतेवाड़ा:- सीजी बोर्ड परीक्षाओं में दंतेवाड़ा की ऐतिहासिक सफलता पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने मन की रविवार को इसका जिक्र किया. उन्होंने कहा कि दंतेवाड़ा की धरती ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि अगर संकल्प और रणनीति सशक्त हो, तो सबसे कठिन परिस्थितियों में भी शिक्षा की रोशनी फैल सकती है. जिस दंतेवाड़ा में कभी माओवाद चरम पर था, वहां आज शिक्षा का परचम लहरा रहा है. पीएम मोदी ने बस्तर ओलंपिक और माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में साइंस लैब के बारे मे जिक्र किया. उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के माओवाद प्रभावित क्षेत्रों के बच्चों में साइंस का पैशन है और वो खेलों में भी कमाल कर रहे हैं. इस दौरान पीएम ने राज्य के साय सरकार की तारीफ की.
दंतेवाड़ा शिक्षा की मिसाल बना: प्रधानमंत्री ने बस्तर क्षेत्र का जिक्र करते हुए कहा है कि इस तरह के प्रयासों से पता चलता है कि इन इलाकों में रहने वाले लोग कितने साहसी होते हैं. पीएम मोदी ने मन की बात के 122वें संस्करण में दंतेवाड़ा जिले की बोर्ड परीक्षाओं में हुई अभूतपूर्व सफलता का विशेष उल्लेख किया है. उन्होंने कहा कि यह जिला अब संघर्ष नहीं, बल्कि शैक्षणिक सफलता की नई मिसाल बन रहा है. इन लोगों ने तमाम चुनौतियों के बीच अपने जीवन को बेहतर बनाने की राह चुनी है.
मुझे यह जानकार भी बहुत खुशी हुई कि 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं में दंतेवाड़ा जिले के नतीजे बहुत शानदार रहे हैं. करीब पंचानबे ( नाइंटी पाइव) प्रतिशत रिजल्ट ये जिला 10वीं के नतीजों में टॉप पर रहा, वहीं 12वीं की परीक्षा में इस जिले ने छत्तीसगढ़ में छठा स्थान हासिल किया.- नरेंद्र मोदी, पीएम
वास्तव में, दंतेवाड़ा का यह परिवर्तन एक साधारण उपलब्धि नहीं, बल्कि दशकों के पिछड़ेपन, माओवादी हिंसा और संसाधनों की कमी के बीच शिक्षा को केंद्र में रखकर की गई एक सुनियोजित क्रांति है. जहां कभी विद्यालय जाने से पहले सुरक्षा की चिंता होती थी, आज वही गांव राज्य स्तर पर बोर्ड परीक्षा में टॉपर्स दे रहे हैं- नरेंद्र मोदी, पीएम
दंतेवाड़ा में नव जागरण की कहानी: दंतेवाड़ा की यह सफलता नव जागरण की कहानी है. यह सफलता केवल परीक्षा पास करने की नहीं, बल्कि आत्मविश्वास,समुदाय में विश्वास और शिक्षा के प्रति नवजागरण की कहानी है. दंतेवाड़ा ने दिखा दिया है कि बंदूक की जगह जब कलम थामी जाती है, तो परिणाम सिर्फ अंक नहीं, बदलाव बन जाते हैं. यह सिर्फ परीक्षा की नहीं, पहचान की जीत है.
पढ़े दंतेवाड़ा, लिखे दंतेवाड़ा’ टेस्ट सीरीज़ हुई सफल: इस परिवर्तन का केंद्र रहा “पढ़े दंतेवाड़ा, लिखे दंतेवाड़ा” नामक अभिनव शैक्षणिक अभियान, जो अगस्त 2023 से जिले के सभी शासकीय उच्च एवं उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में कक्षा 9वीं से 12वीं के छात्रों के लिए संचालित किया गया। इस पहल के अंतर्गत नियमित यूनिट टेस्ट, त्रैमासिक, अर्धवार्षिक, प्री-बोर्ड और मॉक बोर्ड परीक्षाएं आयोजित की गईं। प्रश्नपत्रों को शिक्षकों के पीयर लर्निंग सर्कल (PLC) के माध्यम से तैयार किया गया, जिससे गुणवत्ता और मानकीकरण सुनिश्चित हुआ.
जानिए दंतेवाड़ा कैसे शिक्षा की रफ्तार हुई तेज: उत्तर पुस्तिकाओं की निष्पक्ष जांच के लिए इंटर-स्कूल मूल्यांकन व्यवस्था लागू की गई, जिससे शिक्षक भी एक-दूसरे से सीख सके और छात्रों की निष्पक्ष मूल्यांकन हो सकें. हर छात्र की प्रगति को डिजिटल रूप से ट्रैक किया गया. कमजोर विद्यार्थियों के लिए पूर्व और पश्चात कक्षा में अतिरिक्त कक्षाएं, तथा तेज छात्रों के लिए मेरिट सपोर्ट सत्र आयोजित किए गए.
बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी के दौरान छात्रों में आत्मविश्वास बनाए रखना एक बड़ी चुनौती थी. इस दिशा में जिला प्रशासन द्वारा उत्तर लेखन कौशल, परीक्षा रणनीति, और समय प्रबंधन पर कार्यशालाएं आयोजित की गईं. इसके साथ ही, कुछ स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से विद्यार्थियों के लिए प्रेरणात्मक सत्र और मानसिक तैयारी हेतु सहयोगात्मक गतिविधियां आयोजित की गईं, जिससे विद्यार्थियों का आत्मबल बढ़ा.- दंतेवाड़ा शिक्षा विभाग
बोर्ड परीक्षा में पूरे राज्य में बेहतर प्रदर्शन: दंतेवाड़ा जिले ने 2024-25 की 10वीं बोर्ड परीक्षा में 94.45% के साथ पूरे राज्य में प्रथम स्थान प्राप्त किया. वहीं 12वीं परीक्षा में जिले की रैंकिंग 11वें से बढ़कर छठवें स्थान पर पहुंची. इसके साथ ही सफलता दर 87.66% रही. यह मात्र आंकड़े नहीं हैं, यह उस सामूहिक परिश्रम और दूरदर्शी योजना का परिणाम है जिसने इस नक्सल प्रभावित जिले को राज्य का शैक्षणिक उदाहरण बना दिया.
दंतेवाड़ा जिला प्रशासन ने चुनौतियों का किया समाधान: जिन जिलों में शिक्षकों की कमी थी. वहां शिक्षा समर्थन योजना के तहत स्थानीय स्नातकों को अतिथि शिक्षक के रूप में जोड़ा गया. जहां छात्र स्कूल छोड़ रहे थे, वहां बाला मित्रों ने घर-घर जाकर संवाद किया और बच्चों को दोबारा स्कूल से कनेक्ट किया गया. जहां सुरक्षा की समस्या थी, वहां पोटा केबिन स्कूलों का विस्तार कक्षा 12वीं तक किया गया. प्रत्येक विद्यालय को पास के आवासीय केंद्र से जोड़ा गया. आज भी इन पोटा केबिन में 70 फीसदी से ज्यादा छात्र छात्राएं पढ़ाई कर रहे हैं.
करियर मार्गदर्शन की दी गई सुविधा: दंतेवाड़ा में शिक्षा के विकास के लिए हर विद्यालय में करियर मेंटर शिक्षक नियुक्त किए गए, जिन्होंने नियमित रूप से छात्रों को भविष्य की पढ़ाई और करियर विकल्पों के बारे में मार्गदर्शन दिया. जिले में आयोजित करियर मेले में विशेषज्ञों ने छात्रों से सीधे संवाद किया. साथ ही, पंचायत स्तर पर छात्रों की सार्वजनिक सराहना की गई, जिससे सामुदायिक भागीदारी और छात्रों में गौरव की भावना मजबूत हुई.
पीएम मोदी का यह उल्लेख दंतेवाड़ा को देगा नई दिशा: आज पीएम नरेंद्र मोदी की तरफ से मन की बात कार्यक्रम में किया गया यह उल्लेख, न केवल इस उपलब्धि को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता देने वाला है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण भी है कि स्थानीय प्रयास, प्रतिबद्ध शिक्षक, सजग प्रशासन और जागरूक समुदाय मिलकर किसी भी चुनौती को अवसर में बदल सकते हैं.
