नई दिल्ली:- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी28वें कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए गुरुवार रात दुबई पहुंचे. दुबई एयरपोर्ट पर उनका शानदार स्वागत हुआ. पीएम मोदी आज होने वाले COP28 के वर्ल्ड क्लाइमेट एक्शन समिट में भाग लेंगे. दुनिया के दो सबसे बड़े प्रदूषक होने का ‘तमगा’ हासिल करने के बावजूद, अमेरिका और चीन के नेता COP28 में भाग नहीं ले रहे हैं.
पीएम मोदी जैसे ही दुबई एयरपोर्ट पर उतरे, एक होटल के बाहर इंतजार कर रहे भारतीय प्रवासियों के उत्साहित सदस्यों ने ‘सारे जहां से अच्छा’ गाना गाया और ‘भारत माता की जय’ के साथ-साथ ‘वंदे मातरम’ के नारे लगाए. पीएम मोदी को चाहनेवालों की संख्या पूरी दुनिया में बढ़ती जा रही है. वह किसी भी देश में जाएं, वहां उनके चाहनेवाले नजर आ ही जाते हैं. दुबई में भी पीएम मोदी को चाहनेवालों की कमी नहीं है.
पीएम मोदी ने एक्स पर पोस्ट किया, सीओपी-28 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए दुबई में उतरा हूं. शिखर सम्मेलन शुरू होने का इंतजार कर रहा हूं, जिसका उद्देश्य एक बेहतर ग्रह बनाना है. दुबई में मिला भव्य स्वागत हमारी जीवंत संस्कृति और मजबूत संबंधों का प्रमाण है।
गुरुवार रात दुबई पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकासशील देशों को जलवायु वित्तपोषण और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण का आह्वान किया, जिससे उन्हें जलवायु परिवर्तन से पैदा हुई चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने में सशक्त बनाया जा सके. पीएम मोदी आज जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र के कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज के दौरान वर्ल्ड क्लाइमेट एक्शन समिट में भाग लेंगे. वर्ल्ड क्लाइमेट एक्शन समिट COP28 का उच्च-स्तरीय खंड है.
COP28 में पीएम मोदी की भागीदारी वर्ल्ड क्लाइमेट एक्शन समिट से कहीं ज्यादा है. क्योंकि वह तीन अतिरिक्त कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए तैयार हैं. यूएई की अध्यक्षता में COP28, 30 नवंबर से 12 दिसंबर तक चलता है. पीएम मोदी ने पेरिस समझौते के तहत हुई प्रगति की समीक्षा करने और भविष्य में क्लाइमेट एक्शन पर रोड मैप तैयार करने के लिए एक मंच के रूप में COP28 के महत्व को रेखांकित किया.
दुबई में जलवायु वार्ता एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है, क्योंकि वैश्विक उत्सर्जन में वृद्धि जारी है. संयुक्त राष्ट्र ने गुरुवार को घोषणा की कि 2023 रिकॉर्ड इतिहास में सबसे गर्म वर्ष होने की राह पर है, जिसे लेकर तुरंत कदम उठाने की जरूरत है. इसके तहत नुकसान और क्षति का अनुमान और कोष की स्थापना, जिसकी लंबे समय से जलवायु-संवेदनशील राष्ट्रों द्वारा वकालत की गई थी, उन्होंने COP28 में एक प्रारंभिक जीत दर्ज की.
