जगदलपुर:- चित्रकोट जल प्रपात के नाके के नजदीक एक आदिवासी सरपंच पर पुलिसिया कार्रवाई हुई है. पुलिस ने सरपंच और अन्य 12 ग्रामीणों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया है. अब यह पूरा मुद्दा सियासी रंग ले चुका है. दीपक बैज ने इस मसले पर छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णुदेव साय पर निशाना साधा है.
चित्रकोट पर्यटन स्थल के पार्किंग स्थल से जुड़ा है मुद्दा: तीन दिन पहले जगदलपुर जिला प्रशासन की तरफ से एसडीएम ने चित्रकोट में स्थित पार्किंग को सील कर दिया. उसके बाद इसका पूरा अधिकार चित्रकोट के स्थानीय पंचायत से लेकर जिला प्रशासन के पास रख लिया. इस कार्रवाई का चित्रकोट के लोगों ने विरोध किया. ग्राम पंचायत चित्रकोट के लोग इस फैसले के खिलाफ 19 मई को सड़क पर उतर गए. उसके बाद जिला प्रशासन ने इन प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल का प्रयोग किया.
प्रदर्शनकारियों के खिलाफ केस दर्ज: उसके बाद प्रदर्शन कर रहे लोगों को 19 मई की शाम को जगदलपुर जिला प्रशासन थाने लेकर गया. उनके खिलाफ केस दर्ज किया. केस चित्रकोट के सरपंच और 12 अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज हुआ है. अब इस मसले पर पीसीसी चीफ ने सीएम साय पर सीधा अटैक किया है. दीपक बैज ने इसे सीएम के परिवार से जोड़ दिया है.
दीपक बैज का गंभीर आरोप: दीपक बैज ने इस मसले पर साय सरकार पर गंभीर आरोप लगाया. दीपक बैज ने कहा कि विगत दिनों 15/05/25 को मुख्यमंत्री के बेटी दामाद (राज्य अतिथि) के प्रवास के दौरान लोहंडीगुड़ा के एसडीएम ने चित्रकोट के सरपंच को फोन किया. सरपंच को फोन कर चित्रकोट के सामने बने पार्किंग नाका के पैसे से मुख्यमंत्री के बेटी दामाद के लिए मुर्गा, मटन व अन्य चीजों की व्यवस्था करने के लिए कहा. इस इंतजाम के लिए सरपंच ने मना कर दिया. उसके बाद उसे नोटिस दे कर नाका को बंद करने का निर्देश लोहंडीगुड़ा एसडीएम ने दिया और सरपंच पर केस दर्ज कर दिया. इसके साथ ही 12 ग्रामीणों पर भी केस दर्ज किया.
मुख्यमंत्री को अपने बेटी दामाद की खातिरदारी करवानी ही थी. राज्य सरकार के सत्कार मद से करवा लेते. चित्रकोट मेरा विधानसभा क्षेत्र, लोकसभा क्षेत्र है वे बताते तो मैं खुद अपनी तरफ से उनके दामाद की मेहमान नवाजी करवाता, लेकिन एक आदिवासी सरपंच को प्रताड़ित करवाना उचित नहीं है.- दीपक बैज, पीसीसी चीफ
“जबरिया खातिरदारी की परंपरा हो बंद”: पीसीसी चीफ दीपक बैज के आरोप यहीं पर नहीं रुके. उन्होंने कहा कि ग्रामीणों से जबरिया मुर्गा, मटन और अन्य व्यवस्थाएं कराए जाने की परंपरा पर विराम लगना चाहिए. ऐसे शोषण से समाज में आक्रोश पैदा होता है. उसके बाद यह व्यवस्था के खिलाफ जन आंदोलन का रूप ले लेता है. चित्रकोट के ग्रामीणों ने इस अन्याय के खिलाफ आंदोलन छेड़ा है. सरकार में बैठे हुये लोग अपनी इन्हीं हरकतों से आदिवासियों के मन में सरकार के खिलाफ अविश्वास पैदा करते हैं.