दरअसल आवेदक ने जन सूचना अधिकारी, कलेक्टर कार्यालय रायपुर से गणेश उत्सव 2017 की झांकियां निकलने के दौरान डीजे बजाने की दी गई अनुमतियो की प्रतियां सूचना का अधिकार के तहत चाही थी. परंतु जन सूचना अधिकारी ने आवेदक से ₹8 लेकर गणेश प्रतिमा निकालने के लिए स्वागत मंच निर्माण की अनुमति प्रदान कर दी. मामला सूचना आयोग पहुंचा आयोग ने कलेक्टर रायपुर को रुपए 8 वापस करने के आदेश करते हुए जन सूचना अधिकारी को रुपए 25000 का पेनल्टी नोटिस और अनुशासनात्मक कार्यवाही का नोटिस भी जारी किया परंतु नोटिस तामिल ना होने के कारण अब आयोग ने कलेक्टर कोंडागांव को वहां पदस्थ तत्कालीन जन सूचना अधिकारी कलेक्ट्रेट रायपुर श्रीमती सीमा ठाकुर को नोबिगुलरायपुर. डीजे बजाने की अनुमति से संबंधित गलत सूचना प्रदाय करने के मामले में एक जन सूचना अधिकारी से 8 रूपये वसूली का मामला 5 साल से पीछा नहीं छोड़ रहा है.
टिस तामील कराने की जवाबदारी दी है.जन सूचना अधिकारी को अपना पक्ष 29 जून 2022 को रखना है. आवेदक ने बताया कि आज तक रुपए 8 वापस नहीं किए गए हैं. बता दें कि कलेक्टर द्वारा रुपए 8 वापस किए जाने के पश्चात छत्तीसगढ़ शासन के आदेशानुसार ₹8 की वसूली तत्कालीन जन सूचना अधिकारी से की जावेगी.रायपुर शहर में करोना काल के पहले गणेश उत्सव मैं झांकियां निकालने के दौरान जयस्तंभ चौक पर कई पंडाल लगाकर, पंडालों पर ध्वनि नियमों के विरुद्ध, नेताओं और मंत्रियों के समक्ष डीजे बताया जाता था. जिसकी अनुमति की जानकारी आवेदक ने चाहिए थी, ताकि दोषियों के विरुद्ध कार्यवाही की मांग की जा सके परंतु सूचना नहीं प्रदाय की गई.सूचना चाहने वाले अधिवक्ता व्यास मुनि द्विवेदी ने तेज ध्वनि से डीजे बजाने और गाड़ियों पर बड़े बड़े स्पीकर रखकर डीजे बजाने के मामले में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के आदेश का उल्लंघन किए जाने पर रायपुर के प्रशासनिक अधिकारियों के विरुद्ध अवमानना याचिका दायर की थी. जिसमें अधिकारियों ने शपथपत्र दिया था कि वे उचित कार्यवाही कर रहे हैं. बाद में छत्तीसगढ़ नागरिक संघर्ष समिति ने भी अवमानना याचिका दायर की. जिसमें भी अधिकारियों ने शपथ पत्र प्रस्तुत कर कहा है कि वे हाईकोर्ट के आदेश का शब्द: पालन करेंगे.उत्पात मचा रखा है डीजे वालों ने : संदीप तिवारीआप नेता संदीप तिवारी ने खुल्ला आरोप लगाते हुए कहा कि रायपुर की जनता डीजे और धुमाल के उत्पात से त्रस्त हो चुकी है.
जनता मैं नेताओं के विरुद्ध रोष उत्पन्न हो चुका है और अब चर्चा भी होने लगी है कि अगले चुनाव में ध्वनि प्रदूषण को संरक्षण देने वाले नेताओं को सबक सिखाएंगे.तिवारी ने बताया कि उनकी जानकारी के अनुसार पिछले वर्ष एक त्यौहार के दौरान कलेक्टर द्वारा धुमाल बजाने की अनुमति नहीं देने के बावजूद रायपुर शहर के 2 बड़े नेताओं ने शनिवार के दिन एसडीएम कार्यालय खुलवा कर धुमाल बजाने वालों को अनुमति दिलवाई. उसके बाद सड़कों पर गाड़ियों में बड़े बड़े स्पीकर रखकर धुमाल डीजे बजा कर लाखों शहर वासियों का जीना दूभर किया गया जो अब तक जारी है. अभी भी पुलिस कार्यवाही करती है तो नेतागण धुमाल बजाने वालों के विरुद्ध कार्यवाही न करने के लिए थाने में फोन लगाते हैं.