रायपुर:- ऐतिहासिक दीक्षा महोत्सव का साक्षी बनने छत्तीसगढ़ समेत आसपास के राज्यों के हजारों लोग फाफाडीह के सन्मति नगर पहुंचे थे। इस दौरान तीन युवाओं ने सांसारिक जीवन से संन्यास लेकर संयम स्वीकार किया। अब वे भिक्षु की तरह रहकर पूरा जीवन धर्म में बिताएंगे। फाफाडीह के दिगंबर जैन खंडेलवाल पंचायत में दीक्षा महोत्सव की शुरुआत रविवार दोपहर हुई।
आचार्य विशुद्ध सागर की पावन निश्रा में आयोजित इस कार्यक्रम में राष्ट्रसंत ललितप्रभ सागर भी शामिल हुए। दीक्षा से पहले बाल ब्रह्मचारी निखिल जैनए सौरभ गंगवाल और विशाल जैन ने सन्मति नगर स्थित दिगंबर जैन मंदिर की तीन परिक्रमा की। इसके बाद समाजजन उन्हें अपने कंधों पर बिठाकर दीक्षा स्थल तक पहुंचे।आचार्यश्री ने बाल ब्रह्मचारियों का केश लोच कर दीक्षा की प्रक्रिया शुरू की। उन्होंने मंडप पर विराजित सभी साधुओं से पूछा कि क्या इन्हें दीक्षा देनी चाहिए। सभी ने हां कहा।
दीक्षा प्रक्रिया पूरी होते ही बाल ब्रह्मचारी अपने समस्त वस्त्रों का त्याग कर दिगंबर मुनि बन गए। यह दृश्य देखकर सभा में मौजूद हजारों लोगों की आंखें भर आईं। आचार्यश्री ने कहाए अब भी समय है। चाहो तो वस्त्र धारण कर सांसारिक जीवन में चले जाओ। तीनों ने ना में सिर हिलाते हुए कहा कि गुरुदेव! बहुत सोच.समझकर यह फैसला लिया है। अब ताउम्र संयम पथ पर ही चलेंगे। इतना सुनना था कि पूरा सभा स्थल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
श्वेतांबर जैन संप्रदाय से आने वाले राष्ट्रसंत ललितप्रभ सागर भी इस ऐतिहासिक दीक्षा महोत्सव के साक्षी बने। कुछ वर्षों पहले भीलवाड़ा में भी ऐसा संयोग बना था जब वे आचार्य विशुद्ध सागर द्वारा कराई जाने वाली दिगंबर जैन दीक्षा के साक्षी बने थे। दीक्षा से पहले उन्होंने भीलवाड़ा की स्मृतियों को याद करते हुए कहा कि मैं दिगंबर दीक्षा अद्भुत है। मैं उस वक्त का इंतजार कर रहा हूं जब सभी युवा दिगंबर अवस्था को प्राप्त करेंगे। यह पल वाकई अविस्मरणीय होगा।
तीनों युवाओं ने जब वस्त्रों का त्याग कर दिगंबरत्व को प्राप्त किया तो उनकी यह बात सच साबित होती दिखी।छरपुर मध्यप्रदेश द्ध के रहने वाले निखिल ने सीए की पढ़ाई की है। वहीं महाराष्ट्र के सौरभ गंगवाल नागपुर यूनिवर्सिटी में एमबीए के टॉपर रहे हैं।