नई दिल्ली:– भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने शुक्रवार को 4:2 के बहुमत से रेपो रेट को 6.5% पर स्थिर रखने का फैसला किया है. यह लगातार 11वीं बैठक है जब दरों में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं किया गया है. यह फैसला बढ़ती महंगाई और धीमी आर्थिक विकास की चिंताओं को ध्यान में रखकर लिया गया है. रिजर्व बैंक ने अपने ‘न्यूट्रल’ रुख को बनाए रखा, जिसे अक्टूबर में अपनाया गया था. इससे पहले, RBI का रुख ‘विथड्रॉवल ऑफ अकोमोडेशन’ था.
RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने जानकारी देते हुए कहा कि महंगाई को लेकर RBI का सख्त रुख मुख्य रूप से खाने से जुड़ी वस्तुओं की बढ़ती कीमतों के कारण है, जो अभी तक स्थिर नहीं हो पाई हैं. हालांकि, अच्छे मानसून और कैपिटल एक्सपेंडिचर में वृद्धि की उम्मीदों के चलते RBI भारत की आर्थिक वृद्धि को लेकर आशावादी है. गवर्नर दास ने कहा, “MPC ने आर्थिक विकास की गति में धीमापन देखा, जिससे इस साल की विकास दर के अनुमान में कटौती करनी पड़ सकती है.” रेपो रेट स्थिर रखने का यह फैसला सरकार और अर्थशास्त्रियों के दबाव के बीच लिया गया है.
सरकार ने जाहिर की चिंता
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने उधार की ऊंची दरों को लेकर चिंता जताई है. वहीं, कुछ अर्थशास्त्री चाहते हैं कि RBI कर्ज को सस्ता करने और विकास को प्रोत्साहित करने के लिए कदम उठाए. हालांकि, गवर्नर दास ने तुरंत किसी भी दर में कटौती से इनकार किया है क्योंकि महंगाई अभी भी RBI के 4% के लक्ष्य से ऊपर है. यह बैठक महत्वपूर्ण है क्योंकि यह गवर्नर दास के कार्यकाल की अंतिम पॉलिसी रिव्यू है, जो 10 दिसंबर 2024 को समाप्त हो रही है.
