नई दिल्ली:– पंचांग के अनुसार, आज आमलकी एकादशी व्रत किया जा रहा है। इस दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी के संग आंवले के पेड़ की पूजा-अर्चना करने का विधान है। साथ ही अन्न और धन का दान करना चाहिए। धार्मिक मान्यत है कि सच्चे मन से आमलकी एकादशी व्रत को करने से सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।
इस दिन पूजा के समय आमलकी एकादशी का पाठ करना चाहिए। मान्यता है कि कथा का पाठ करने से एकादशी व्रत सफल होता है और साधक के सभी पापों का नाश होता है। इसलिए आमलकी एकादशी पर व्रत कथा का पाठ करना चाहिए। आइए पढ़ते हैं आमलकी एकादशी की व्रत कथा।
आमलकी एकादशी व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, वैदिक नामक एक नगर में चंद्रवंशी राजा राज्य करते थे। नगर में लोग श्रीहरि के भक्त थे और सभी विधिपूर्वक एकादशी का व्रत किया करते थे। एक बार सभी नगरवासी फाल्गुन माह शुक्ल पक्ष के आमलकी एकादशी का व्रत कर विष्णु जी की पूजा कर थे। उसी समय वहां एक महापापी शिकारी का आगमन हुआ। शिकारी वहां रुककर भगवान विष्णु की कथा सुनने लगा। इस तरह उस शिकारी ने अपनी पूरी रात जागरण करते हुए बिताया। इसके बाद घर आकर वह सो गया। कुछ दिनों बाद ही उस बहेलिया का निधन हो गया।
उसे पापों की वजह से नरक का सामना करना पड़ा, लेकिन एक बार अनजाने में आमलकी एकादशी व्रत कथा सुनी थी और जागरण भी किया था, एकादशी सुनने से उसे शुभ फल प्राप्त हुआ। उसने राजा विदूरथ के घर जन्म लिया और उसका नाम वसुरथ रखा गया। एक दिन वसुरथ जंगल में भटक गया और एक पेड़ के नीचे सो गया। उस पर कुछ डाकुओं ने हमला कर दिया, लेकिन उनके अस्त्र-शस्त्र का राजा पर कोई असर नहीं हुआ और राजा सोते रहे।
एक बार जब नगर के राजा की नींद खुली तो उसने देखा कि कुछ लोग जमीन पर मृत पड़े हुए हैं।ऐसा देख राजा समझ गए कि वह उसे मारने आए थे। इसी दौरान आकाशवाणी हुई कि जगत के पालनहार भगवान विष्णु ने तेरी जान बचाई है। पिछले जन्म में तुमने आमलकी एकादशी व्रत किया था और कथा का पाठ सुना था। उसी व्रत का यह फल आपको मिला है।
