नई दिल्ली:– भारत में मोटापा सबसे बड़ी समस्य के रुप में उभर आया है। ओबिसिटी से पीड़ित लोगों की संख्या पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़ी है। हाल ही में द लॅन्सेट की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में हर साल करीब 7 करोड़ लोग मोटापे का शिकार हो रहे हैं जिसमें करीब साढ़े चार करोड़ महिलाएं और ढ़ाई करोड़ पुरुष हैं और डेढ़ करोड़ बच्चे ओबेसिटी का शिकार हो रहे हैं। जिसपर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी चिंता जताई है और कुछ उपाय भी सुझाए है।
हर कोई फिट रहना चाहता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि मिडल एज यानी 40-50 की उम्र में कमर-से-कूल्हे का सही अनुपात बनाए रखना बुढ़ापे में दिमाग को तेज बनाए रखने में मदद कर सकता है? जी हां… यह निष्कर्ष ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस और नीदरलैंड के डॉक्टरों ने करीब 1,200 लोगों के कई सालों के हेल्थ डेटा को स्टडी करके निकाला है। रिसर्च के अनुसार जो लोग मिडल एज यानी 40-50 की उम्र में सही खानपान और फिटनेस का ध्यान रखते हैं, उनका दिमाग बुढ़ापे में भी बेहतर तरीके से काम करता है। वहीं, जिन लोगों का वजन पेट के आसपास ज्यादा होता है उनकी याददाश्त कमजोर होने और दिमागी सेहत बिगड़ने का खतरा अधिक बढ़ जाता है।
कैसे करता है असर?
रिसर्चर ने बताया कि हेल्दी डाइट और कमर-से-कूल्हे का सही अनुपात बनाए रखने से दिमाग का हिप्पोकैम्पस हिस्सा बेहतर तरीके से काम करता है। हिप्पोकैम्पस वही भाग है, जो याददाश्त और सीखने की प्रक्रिया में मदद करता है, जिससे दिमागी कार्यक्षमता बेहतर होती है।
मोटापा बढ़ाए भूलने का खतरा
रिसर्च में यह पाया गया कि जिन लोगों की उम्र 40 के आसपास थी और जिनका पेट का हिस्सा बड़ा था, वे 70 की उम्र में पहुंचने पर याददाश्त और फैसले लेने की क्षमता में कमी दिखाने की ज्यादा संभावना रखते हैं। यानी अल्जाइमर की समस्या से जुझते है।
किसने किया शोध?
इस अध्ययन में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी, मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट (लीपजिग), यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन, यूनिवर्सिटी ऑफ मोंपेलियर, रैडबॉड यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर (नाइमेजेन) और पेरिस सिटी यूनिवर्सिटी के कई रिसर्चर शामिल थे। यह रिसर्च अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन की न्यूजपेपर Jama Network Open में पब्लिश हुआ है।
फिट रहना न सिर्फ शरीर के लिए बल्कि दिमाग के लिए भी बेहद जरूरी है। मिडल एज में उचित आहार और पेट की चर्बी को कंट्रोल करना बुढ़ापे में दिमागी सेहत को मजबूत बनाए रख सकता है।
