आरबीआई भी ले सकता है बड़ा फैसलाईसीबी और उसके बाद अमेरिकी सेंट्रल की ओर से बढ़ोतरी के बाद भारत का रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया भी ब्याज दरों में इजाफे का फैसला ले सकता है. यह इजाफा अधिकतम 25 बेसिस प्वाइंट हो सकता है. अगर आरबीआई ने 25 बेसिस प्वाइंट का इजाफा किया तो भारत में सेंट्रल बैंक की ब्याज दरें 8 साल के हाई पर पहुंच जाएंगी. मौजूदा समय में आरबीआई के पॉलिसी रेट 6.50 फीसदी पर हैं, जो अप्रैल की पॉलिसी मीटिंग के बाद 6.75 फीसदी पर पहुंच सकते हैं. ब्याज दरों में इजाफे का एक कारण और भी है कि देश में कोर महंगाई 6 फीसदी से ज्यादा है भले ही फरवरी के महीने में इसमें मामूली गिरावट देखने को मिली हो.
भारत के लोगों की जेब पर पड़ेगा असरअगर आरबीआई ने ब्याज दरों में इजाफा किया तो आम लोगों की जेब पर डायरेक्टर देखने को मिलेगा. बैंकों की ओर से रिटेल लोन की ब्याज दरों में इजाफा हो जाएगा. जिसमें होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन शामिल हैं. देश के बैंक लोन के अमाउंट में इजाफा तो नहीं करते हैं, लेकिन ईएमआई के टेन्योर में बढ़ोतरी कर देते हैं.
इसका मतलब है कि जो ईएमआई 25 या 30 महीने की होती है, ब्याज दरों में इजाफा होने के बाद यह बढ़कर 27 या 32 महीने की हो जाती हैं. इसका मतलब है कि आम लोगों की जेब पर बोझ बढ़ जाता है.2.50 फीसदी का हो चुका है इजाफामई 2022 से जो सिलसिला आरबीआई ने ब्याज दरों में इजाफे का शुरू किया था, वो फरवरी तक बादस्तूर जारी रहा है. मई 2020 से पहले आरबीआई के पॉलिसी रेट 4 फीसदी पर थे, जिसमें फरवरी तक 2.50 फीसदी का इजाफा देखने को मिल चुका है. इसका मतलब है कि सेंट्रल बैंक के पॉलिसी रेट 6.50 फीसदी पर आ गए हैं.
फरवरी के महीने में 25 बेसिस प्वाइंट का इजाफा किया गया था. उससे पहले 35 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी देखी गई थी. इसका मतलब है कि आरबीआई का रुख ब्याज दरों में इजाफे को लेकर बीते महीने में नरम देखने को मिला है. कुछ जानकारों का कहना है कि आरबीआई ब्याज दरों में इजाफा ना भी करे.विदेशी निवेशकों जाएंगे बाहरफेड रेट हाइक से विदेशी निवेशक भारतीय बाजारों से अपना पैसा बाहर निकाल सकते हैं. पिछले कई महीनों से देखने को मिल रहा है फेड रेट हाइक से विदेशी निवेशकों का भारत से आउटफ्लो लगातार बढ़ रहा है. आंकड़ों के अनुसार भारतीय शेयर बाजारों से विदेशी निवशकों ने 28,852 करोड़ रुपये निकाला था. वहीं फरवरी के महीने में यह उटफ्लो 5294 करोड़ रुपये का देखने को मिला है.
इस साल अभी तक विदेशी निवेशक शेयर बाजारों से 26,255 करोड़ रुपये निकाल चुके हैं, पिछले साल 2022 में यह आंकड़ा 1,21,439 करोड़ रुपये था.शेयर बाजार में देखने को मिलेगी गिरावटफेड के फैसले के बाद भारतीय शेयर बाजारों में गिरावट देखने को मिल सकती है. ऐसा पहली बार नहीं हुआ है. मार्च 2023 से लेकर फरवरी 2023 तक फेड की 8 मीटिंग हो चुकी है. जिनमें 7 बार भारतीय शेयर बाजार में गिरावट देखने को मिली थी. फरवरी फेड मीटिंग के बाद भारत के शेयर बाजार में 0.26 फीसदी की तेजी आई थी. इस टेबल में आप साफ देख सकते हैं कि आखिर फेड के एक्शन से भारत के शेयर बाजारों ने किस तरह का रिएक्शन दिया…
फेड पॉलिसी घोषणा की डेट कितना बढ़ाया ब्याज सेंसेक्स का कैसा रहा रिएक्शन16 मार्च, 2022 0.25 फीसदी – 1.85 फीसदी04 मई, 2022 0.50 फीसदी – 0.06 फीसदी15 जून, 2022 0.75 फीसदी -1.99 फीसदी27 जुलाई, 2022 0.75 फीसदी -1.87 फीसदी21 सितंबर, 2022 0.75 फीसदी -0.57 फीसदी2 नवंबर, 2022 0.75 फीसदी -0.11 फीसदी14 दिसंबर, 2022 0.50 फीसदी -1.40 फीसदी1 फरवरी, 2022 0.50 फीसदी 0.26 फीसदीरुपये में आएगी गिरावटवहीं दूसरी ओर रुपये में भी गिरावट देखने को मिल सकती है. वास्तव में फेड रेट हाईक से डॉलर इंडेक्स में तेजी देखने को मिलती है. वैसे डॉलर इंडेक्स मौजूदा समय 103 के लेवल पर कारोबार कर रहा है. वहीं डॉलर के मुकाबले 82.67 रुपये पर कारोबार कर रहा है.