धुले: – आगामी स्थानीय निकाय चुनावों की तैयारियों के बीच शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने महाराष्ट्र के गुलमोहर सरकारी रेस्ट हाउस का दौरा किया. वहां पहुंचते ही उन्होंने सबसे पहले चर्चित कमरा नंबर 102 के बारे में जानकारी मांगी. संजय राउत ने बताया कि देशभर से, विशेषकर दिल्ली से, उनसे यही पूछा जा रहा है कि इस कमरे में आखिर क्या हुआ, नकदी किसकी थी, और इसके बाद प्रशासन ने क्या कार्रवाई की?
संजय राउत ने यह आरोप लगाया कि इस कमरे में दो करोड़ रुपये नकद पाए गए, और यह पैसा भ्रष्टाचार का हिस्सा है. उन्होंने कहा कि यह धन “प्राक्कलन समिति” के अध्यक्ष से जुड़ा है, जिनका वेतन तो डेढ़ करोड़ रुपये है, लेकिन उन्होंने करोड़ों रुपये की रिश्वत कथित रूप से ठेकेदारों से इकट्ठा की. उन्होंने राज्य सरकार से तीखे सवाल पूछे कि अब तक इस मामले में कितने लोगों को गिरफ्तार किया गया है?
राउत ने यह भी दावा किया कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के एक पदाधिकारी कामराज निकम के खिलाफ झूठे मामले दर्ज किए गए, जबकि करोड़ों की नकदी के मामले में पुलिस अधीक्षक ने कोई तत्परता नहीं दिखाई. उन्होंने इसे “सीधा आतंकवाद” करार देते हुए कहा कि यह प्रशासनिक दुरुपयोग का उदाहरण है. उन्होंने मुख्यमंत्री और गृहमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर कटाक्ष करते हुए पूछा कि भ्रष्टाचार के नाम पर कार्रवाई करने की घोषणाएं सिर्फ भाषणों तक ही सीमित क्यों हैं?
संजय राउत ने आरोप लगाया कि भाजपा और शिंदे गुट की सरकार ईडी से बचने के लिए सौदेबाज़ी कर रही है और ऐसे नेताओं को संरक्षण दे रही है जिन पर गंभीर आरोप हैं. उन्होंने कहा कि जो लोग विधानसभा में भ्रष्टाचार को रोकने की बात करते हैं, उनके पैरों के नीचे भ्रष्टाचार पल रहा है.
उन्होंने सभी विपक्षी दलों से इस मुद्दे पर एकजुट होकर आवाज़ उठाने की अपील की. राउत ने स्पष्ट कहा कि यदि विपक्ष इस मुद्दे पर चुप है, तो यह मान लेना चाहिए कि वे सरकार में विलीन हो चुके हैं. अंत में उन्होंने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ एक पार्टी की नहीं, बल्कि लोकतंत्र और पारदर्शिता के लिए है.