उन्होंने कहा कि एलएसी को लेकर चीन की ओर से जो भी जानकारी दी जा रही है वह वास्तव में तर्कसंगत नहीं है. उन्होंने कहा कि भारत लगातार कह रहा है कि पूर्वी लद्दाख से लगती सीमा पर हालात सामान्य नहीं हैं. सीमा पर शांति और सौहार्द दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने के लिए बेहद अहम हैं.चीन के साथ रिश्ते नहीं हैं सामान्यचीन में साल 2009 से 2013 तक भारत के राजदूत रह चुके एस जयशंकर ने कहा, चीन के साथ रिश्ते की कमजोरी ये है कि आपको कभी भी ये पता नहीं चल पाता कि वो क्या करने जा रहे हैं.
यही कारण कि चीन के साथ रिश्ते में हमेशा ही अस्पष्टता रहती है. जयशंकर ने कहा कि लद्दाख में जो घटना घटी उसको लेकर चीनी पक्ष ने अलग-अलग समय पर अलग-अलग बात रखी है लेकिन उनमें से कोई भी सही नहीं है. गलवान घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद से कई स्थानो पर गत तीन साल से गतिरोध बना हुआ है. कई दौर की राजनयिक और सैन्य स्तर की वार्ता के बाद कई स्थानों से दोनों देशों के सैनिक पीछे हटे हैं.
चीन के इस तरह की हरकत से भारत में चीन के प्रति धारणा पर भी असर पड़ा है. जयशंकर ने कहा कि मुझे लगता है कि चीन इसे तात्कालिन मुद्दा बनाकर रखना चाहता है. ऐसे में ये मसला अपेक्षा से लंबा खिंच सकता है.988 के बाद भारत-चीन संबंध हुए सामन्यउन्होंने कहा, साल 1962 में दोनों देशों के बीच जंग हुई. उसके बाद सैन्य घटनाएं भी हुईं लेकिन 1975 के बाद सीमा पर कभी भी लड़ाई में कोई हताहत नहीं हुआ था. उन्होंने कहा कि साल 1988 के बाद भारत और चीन के संबंध और भी ज्यादा सामान्य हो गए जब तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी चीन चले गए.
उन्होंने बताया कि सीमा पर स्थिरता के लिए साल 1993 और साल 1996 में चीन के साथ दो समझौते हुए, जो विवादित हैं. उन्होंने कहा, उन मुद्दों पर बातचीत चल रही है.2020 में चीन ने सीमा पर तैनात किए सैनिकउन्होंने कहा कि समझौते के तहत दोनों देशों के बीच सहमति बनी कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर न तो भारत और न ही चीन की ओर से सेना इकट्ठी की जाएगी.
अगर एलएसी पर कोई भी पक्ष एक निश्चित संख्या से अधिक सैनिक लाता है, तो वह दूसरे पक्ष को सूचित करेगा. मंत्री ने कहा, ये पूरी तरह से स्पष्ट समझौता था. 2020 में जब भारत कोविड-19 लॉकडाउन के दौर से गुजर रहा था तब बड़ी संख्या में चीन सैनिक वास्तविक नियंत्रण रेखा की ओर बढ़ रहे थे. उन्होंने कहा कि चीन की इस हरकत को देखते हुए हमें भी सीमा पर सैनिकों की संख्या बढ़ानी पड़ी.
