पिछले कुछ सालों से सऊदी अरब और अमेरिका में तनाव बढ़ता हुआ दिख रहा है. सऊदी अरब एक वक्त तक यूएस का खास था लेकिन अब वो चीन की तारीफ करने लगा है. जाहिर है सऊदी का बदला रुख अमेरिका की चिंता बढ़ा सकता है. मंगलवार को सऊदी किंग मोहम्मद बिन सलमान ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से फोन पर बात की. सऊदी किंग ने इस दौरान चीन की जमकर तारीफ की. बताया ये भी जा रहा ही शी जिंनपिंग ने भी सऊदी और ईरान के बीच हुई वार्ता को लेकर प्रसन्नता जाहिर की है.दरअसल पिछले 10 मार्च को शी जिनपिंग ने क्षेत्रीय शांति के मकसद से सऊदी अरब और ईरान के बीच शांति समझौता कराने का ऐलान किया था, जिसके कुछ दिनों बाद दोनों देशों ने आपसी दुश्मनी को भुलाकर चीन की बात मान ली.
दोनों देशों ने इस समझौते के बाद एक दूसरे के देशों में दूतावास खोलने के लिए भी राजी हो गए हैं. चीन ने इसके बाद सऊदी की खूब तारीफ की. यानी तारीफ के पुल दोनों ही तरफ से बांधे जा रहे हैं.सऊदी किंग ने क्यों की चीन की तारीफ ?सऊदी अरब के किंग का मानना है कि “चीन जिस प्रकार अंरराष्ट्रीय मामलों में बढचढ़ कर हिस्सेदारी ले रहा है, इससे क्षेत्रीय स्थिरता को बल मिलेगा. चीन का ये कदम सराहनीय है. हम शी जिनपिंग की इस पहल की कद्र करते हैं.”इसी के साथ दोनों देशों में एक विशाल तेल परिसर को लेकर भी समझौता हुआ.
सऊदी और चीन की तेल कंपनी ने 3.5. बिलियन डॉलर का समझौता किया. यानी सऊदी-चीन का ये समझौता आपसी जरूरत के लिहाज से व्यापार बढ़ाने वाला तो है साथ ही संकेतों में अमेरिका को परेशान करने वाला भी है.सऊदी किंग के ये तारीफों के शब्द यूं ही नहीं हैं. गौर करें तो पिछले कुछ सालों में चीन और सऊदी के बीच धीरे-धीरे दोस्ती बढ़ी है.
व्यापार के दायरे का विस्तार हुआ है. शी जिनपिंग ने साल 2016 में भी सऊदी, ईरान और मिस्र का दौरा किया था. और कूटनीतिक समझौते किये थे.दोनों देशों ने तभी बेल्ट एंड रोड प्रोजेक्ट को मिलकर तैयार करने का समझौता किया था. साल 2021 में चीन और सऊदी अरब में 330 अरब डॉलर का समझौता हुआ था. जिसे पहले के मुकाबले काफी माना गया था.पहले भी कर चुके हैं एक दूसरे की तारीफसाल 2022 में रियाद में हुए खाड़ी देशों के सम्मेलन में जब शी जिनपिंग पहुंचे थे तब भी सऊदी और चीन की निकटता दिखी थी.
दिसंबर महीने में हुए उस सम्मेलन में सऊदी के किंग ने कहा था कि चीन अब दुनिया का नेतृत्व कर सकता है. सऊदी किंग का तब भी वह बयान काफी सुर्खियों में आया था और अमेरिका के खिलाफ समझा गया था.वहीं चीन ने तब खाड़ी देशों से दो हजार साल पुरानी मित्रता का हवाला दिया और कहा था हमारे बीच संबंध सुधार होने चाहिए और नये क्षेत्रों में विकास के लिए समझौते के रास्ते खोले जाने चाहिए.अमेरिका से मोहभंग के क्या हैं कारण?खाड़ी देशोें का अमेरिका से मोहभंग काफी पहले से ही हो चुका है. लेकिन पिछले साल ओपेक प्लस के तेल उत्पादन में कटौती के फैसले को लेकर दोनों देशों में तनाव बढ़ गये थे.
अमेरिका का मानना था कि इससे रूस को लाभ होगा. हालांकि तब सऊदी ने ऐसे किसी कयास को खारिज कर दिया था लेकिन अमेरिका ने अंजाम भुगतने की चेतावनी दे दी थी. तभी से सऊदी भी अमेरिका से दूरी बना रहा है. अब उसने चीन की तारीफ कर दी है.सऊदी-चीन की दोस्ती अमेरिका के लिए सबकहाल ही में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मॉस्को जाकर मुलाकात की थी.