नई दिल्ली, 28 फरवरी। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि देश में 6,865 करोड़ रुपए की लागत से 10 हजार नए कृषक उत्पादक संगठन (एफपीओ) बनाने की योजना तेजी से आगे बढ़ रही है।
श्री तोमर ने आज सीआईआई-एनसीडीईएक्स एफपीओ समिट का वर्चुअल शुभारंभ करते हुए कहा कि इनसे करोड़ों छोटे किसानों को बहुत सुविधा होगी, इससे खेती में उनकी लागत में काफी कमी आएगी, साथ ही उनके उत्पादों की गुणवत्ता वैश्विक मानदंडों के अनुरूप बढ़ेगी और कृषि निर्यात भी बढ़ेगा।
उन्होंने कहा कि एफपीओ का और विस्तार करने की जरूरत है क्योंकि हमारे देश में अधिकांश छोटे किसान हैं और इन्हें आगे बढ़ाने में यह बहुत ही कारगर योजना है। एफपीओ के माध्यम से किसान संगठित होकर अपनी खेती कर सकते हैं, सामूहिक रूप से उपकरण तथा आदान खरीद सकते हैं। टेक्नालाजी का उपयोग कर सकते है, जिससे निश्चित रूप से उत्पादन लागत कम होगी। उत्पादों की गुणवत्ता एवं प्रकार अच्छा होगा तथा उनकी ग्राहकों तक पहुंच आसान हो सकेगी। एफपीओ की परिकल्पना किसानों को सुविधा प्रदान करने और उनकी आय बढ़ाने के लिए की गई है।
कृषि मंत्री ने कहा कि एफपीओ से कृषि क्षेत्र की ओर नये लोग आकर्षित होंगे तथा कृषि क्षेत्र में पढ़े-लिखे लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित हो सकेंगे, इस संबंध में प्रगति की मंशा सरकार की है। इसमें सभी संगठनों से सहयोग की अपेक्षा भी श्री तोमर ने जताई।
श्री तोमर ने कहा कि सरकार कृषि को लाभप्रद और किसानों को समृद्धशाली बनाने के लिए सतत् प्रयत्नशील है। सरकार की कोशिश है कि किसानों तक वित्त पहुंचे, उत्पादों की बाजार से समबद्धता बने, बिचौलियों की समाप्ति तथा फसल विविधीकरण हो। किसान महंगी फसलों की ओर जाएं, टेक्नालाजी से जुड़े, उनके उत्पादों की गुणवत्ता अच्छी हो जिससे वे वैश्विक मानदंडों के आगे टिक सकें और अपने देश के कृषि उत्पादन को बढ़ाने में भी वे योगदान दे सकें।
उन्होंने कहा कि हमारे देश के किसान और कृषि क्षेत्र में रुचि रखने वाले सभी लोग इस दिशा में तेजी के साथ प्रयत्न कर रहे हैं, जिसका परिणाम भी आज हम सबको परिलक्षित हो रहा है। अधिकांश कृषि उत्पादों के मामले में हम दुनिया में पहले या दूसरे पायदान पर हैं। कोविड जैसी महामारी के दौर में भी हमारे कृषि क्षेत्र की प्रगति हम सबको उत्साहित करने वाली है। कृषि ने प्रतिकूलताओं में भी अपनी प्रासंगिकता सिद्ध की है, जो और अधिक ताकत से हमको आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है।
श्री तोमर ने कहा कि कृषि क्षेत्र में निवेश की कमी काफी लंबे समय से महसूस की जाती रही है। वर्ष 2014 के आसपास किसान को अल्पकालिक ऋण छह-सात लाख करोड़ रुपए के करीब मिलता था जो आज 18 लाख करोड़ रुपये तक किसानों के पास पहुंचा है, जिससे साहूकारी ऋण से भी किसानों को मुक्ति मिली और अपने खेती के कामकाज को आगे बढ़ाने में उन्हें मदद मिली है। पीएम किसान सम्मान निधि योजना से साढ़े 11 करोड़ किसानों को 1.82 लाख करोड़ रुपये पहुंचाए गए हैं। आत्मनिर्भर पैकेज के अंतर्गत एक लाख करोड़ का फंड बनाया गया है, जिस पर तेजी के साथ काम हो रहा है, एफपीओ भी इस फंड का फायदा ले सकते हैं, इसके लिए प्रावधान किए गए हैं।
उन्होंने किसानों के हितों के लिए संगठनों से सतत सहयोग की अपेक्षा की। समिट में कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी, नाबार्ड अध्यक्ष डॉ जी.आर.चिंताला, सीआईआई-राष्ट्रीय कृषि परिषद के अध्यक्ष संजीव पुरी तथा नेबकान के एमडी के.जी. राव और अन्य गणमान्य मौजूद थे।