छत्तीसगढ़ :–ताड़मेटला में 76 सीआरपीएफ जवानों की शहादत, झीरम घाटी में शीर्ष नेतृत्व पर जघन्य हमले और सैकड़ों निर्दोषों की हत्या के आरोपी माओवादी कमांडर मांडवी हिड़मा के मारे जाने के बाद सोशल मीडिया पर जबरदस्त विवाद छिड़ गया है।
बटालियन नंबर-1 और माओवादी केंद्रीय कमेटी में सक्रिय हिड़मा की मौत के बाद कई लोग सोशल मीडिया पर खुले तौर पर उसका समर्थन कर रहे हैं और इस मुठभेड़ को फर्जी बताने की कोशिश कर रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, दिल्ली में लगाए गए कुछ नारों ने साफ कर दिया है कि माओवादी संगठन से सहानुभूति रखने वाले तत्व नक्सलियों के मारे जाने पर खुलकर सामने आ गए हैं।
मामले में बस्तर रेंज के आईजी ने स्पष्ट कहा कि, किसी विचारधारा का समर्थन अलग बात है, लेकिन यदि कोई व्यक्ति हिंसा को बढ़ावा देने या उसे उचित ठहराने में शामिल पाया जाता है, तो उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
आईजी ने बताया कि मांडवी हिड़मा के पास आत्मसमर्पण का पूरा अवसर था, जैसे उसके कई वरिष्ठ साथियों ने किया। सरकार ने भी उसे सुरक्षित समर्पण का अवसर देने की कोशिश की थी, लेकिन उसने हिंसा का रास्ता नहीं छोड़ा।
पुलिस की सोशल मीडिया पर कड़ी नजर
आईजी ने यह भी कहा कि, समाज में हिंसक गतिविधियों के लिए कोई स्वीकार्यता नहीं है। अपराध करने वालों के खिलाफ पुलिस सख्ती से कार्रवाई करती है।
उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया पर हिड़मा के समर्थन में जो प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, उन पर पुलिस की लगातार निगरानी है। यदि कोई व्यक्ति संगठन के लिए प्रचार या हिंसा के समर्थन में कुछ भी करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
