पटना:- बिहार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बदल दिये गए हैं और अखिलेश प्रसाद सिंह की जगह विधायक राजेश कुमार को कांग्रेस की कमान सौंपी गई है.जिस तस्वीर की चर्चा हम कर रहे हैं यह इसी कहानी से जुड़ी हुई है. किसी भी राजनीतिक संगठन में बदलाव होते हैं और होते रहेंगे, लेकिन बिहार कांग्रेस का यह बदलाव राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम है. एक दलित विधायक राजेश कुमार को बिहार कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया है, मगर जिन्हें हटाया गया है वह काफी महत्वपूर्ण है.सवर्ण चेहरा अखिलेश सिंह को अध्यक्ष पद से हटाकर एक दलित को कांग्रेस की कमान सौंपना और फेस बनाना निश्चित तौर पर कांग्रेस में राजनीति की दृष्टि से यह बड़ा परिवर्तन कहा जा रहा है. इसके दूरगामी प्रभाव भी पार्टी में पड़ेगा, इसकी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. हालांकि, यह प्रभाव अधिक सकारात्मक होगा या फिर नकारात्मक, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी. हालांकि, बात उस तस्वीर की जो पुराने कांग्रेस के अध्यक्ष और नए कांग्रेस के अध्यक्ष के मिलने के दौरान सामने आई है. दो दिन पहले दोनों की मुलाकात तो आमने-सामने की हुई, अभिवादन भी हुआ, लेकिन न तो नजरें मिलीं और न गले मिले. खास बात यह कि न कोई गुफ्तगू ही हो पाई. अब इस तस्वीर को बिहार के सियासत के जानकारी अपने नजरिये से देख रहे हैं.
बता दें कि बिहार में कांग्रेस ने अब तक 42 अध्यक्ष बनाए हैं. इनमें कई दलित चेहरे भी कांग्रेस की कमान संभाल चुके हैं और राजेश कुमार इस क्रम में चौथे नंबर पर आते हैं. सबसे पहले वर्ष 1977 में मुंगेरीलाल कांग्रेस के अध्यक्ष बनाए गए थे. वहीं, वर्ष 1985 में डूमरलाल बैठा, इसके बाद वर्ष 2013 में अशोक चौधरी दलित अध्यक्ष बने थे. अब राजेश कुमार चौथे कांग्रेस अध्यक्ष हैं जो दलित बिरादरी से आते हैं. राजेश कुमार बिहार के औरंगाबाद जिले के कुटुंब विधानसभा क्षेत्र से एमएलए हैं. इनके पिता दिलकेश्वर राम भी कांग्रेस में 1980 और 85 में विधायक रह चुके थे. जाहिर तौर पर पार्टी संगठन में बदलाव होते रहे हैं और एक बार फिर हुआ है. लेकिन, सवाल यह है कि कांग्रेस ने और चुनाव से पहले अध्यक्ष को क्यों बदला, क्या यह कांग्रेस की रणनीति का हिस्सा है?
कांग्रेस की ‘बैक टू रूट्स’ पॉलिसी!
राजनीति के जानकार इस बदलाव को बिहार में कांग्रेस के ‘अपनी जड़ों की ओर लौटो’ की रणनीति से जोड़कर देख रहे हैं और बिहार में कांग्रेस के अपने पुराने जनाधार की ओर लौटने की एक कवायद बता रहे हैं. बता दें कि कांग्रेस के परंपरागत वोटर सवर्ण, मुस्लिम और दलित रहे हैं और यह इस बार भी इसी को साधने की कवायद कही जा रही है. लेकिन, अखिलेश सिंह क्यों हटाए गए और उनकी नाराजगी क्यों दिख रही है, यह बड़ा सवाल है, जिसकी चर्चा सियासी गलियारों में खूब हो रही है. वरिष्ठ पत्रकार अशोक कुमार शर्मा कहते हैं, राज्यसभा के सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के काफी नजदीकी माने जाते हैं. वह स्वयं भी इस बात को हमेशा स्वीकार करते हैं कि लालू प्रसाद यादव ने उन्हें राजनीति में आगे बढ़ाया है. शायद यही बात अखिलेश प्रसाद सिंह के विरुद्ध चली गई.
