
आस्था और श्रद्धा से खास पहचान है: ऐतिहासिक राम-जानकी मंदिर का मठ
चांपा। जांजगीर-चांपा जिले के चांपा नगर के मध्य भाग में स्थित राम-जानकी मंदिर लगभग 250 वर्ष पुराने इस मंदिर में एक ओर जगन्नाथ और राम लक्ष्मण सीता की मूर्ति स्थापित है तो दुसरी ओर ठीक सामने हनुमानजी की दक्षिणमुखी मूर्ति दर्शनीय है मंदिर में प्रतिस्थापित मूर्तियों को देखने से ऐसा लगता है मानों जगन्नाथ जी के रुप में हनुमानजी के नेत्र श्रीरामचंद्र जी का रुप अन्वेषण करने में लगे हुए हैं। मंदिर की नींव यहां के भूतपूर्व जमींदार स्वर्गीय विश्वनाथ सिंह ने रखा और जमींदार नारायण सिंह ने अपने शासनकाल में इस मन्दिर एवं मठ का निर्माण कार्य पूर्ण किया तथा प्रेमसिंह ने अपने पिताश्री के इस ऐतिहासिक धरोहर की प्रतिष्ठा कर इतिहास में अपना नाम अंकित किया ।नगर मे शिल्पकला एवं मूर्तिकला के रुप में स्थापित यह मठ पाषणकला में उत्कृष्ट नयनाभिराम चित्र उजागर करता है।
वैसे इस मठ के प्राचीन वैभव के संबंध में पंड़ित छविलाल व्दिवेदी ने लिखा हैं कि चांपा नगर के मध्य में बहुत ऊंचा और विशाल हरि मंदिर है जहां साधुओं वैष्णवों की सेवा हुआ करती है, वहां अनेक वैष्णव रहते हैं जिनका दर्शन भक्तों के लिए कल्याणकारी होता हैं ।
इस राममंदिर की देखरेख के लिए सैकड़ों एकड़ भूमि दिया गया था,किन्तु यह ज़मीन भी नियंत्रण में नहीं होने के कारण बिक गई! इस स्थल को व्रिक्रय करने के बाद प्राप्त रकम जिर्णोद्धार के लिए किया गया । लगभग 250 वर्ष प्राचीन , प्राचीन धरोहरों की सुध लेने किसी को दरकार नहीं है? सुप़सिध्द राम-जानकी मंदिर बड़े मठ मंदिर के नाम से आंचल में मशहूर है इस मंदिर के सामने ही हनुमानजी की मूर्ति एक सांन्द सिन्दूर लिप्त दूसरी मूर्ति दोनों हाथ जोड़े बैठी हैं, मानो प्रभुत्व के सामने आज्ञा की बांट जोह रहें हो । जन्माष्टमी, रथयात्रा, हनुमान जयंती, दशहरा ,दीपावली आदि पर्व में भक्तों के विशाल समुह से प्रांगण भर जाता हैं ।प्रतिवर्ष श्रीमद्भभागवत ज्ञान, यज्ञोपवीत संस्कार, रामकथा एवं राम नाम सप्ताह का आयोजन किया जाता हैं पत्थर के विशाल चट्टानों से बना हुआ अद्वितीय मंदिर को देखने से पता चलता है कि निर्माताओं ने आपार श्रद्धा अर्पित कर निर्माण किया होगा । लोगों का कहना है कि निर्माताओं कलाकारों का योगदान चांपा नगर के ऐतिहासिक धरोहर के रूप में अंचल में स्थापत्य कला मूर्तिकला का प्रतिनिधित्व करने वाला एकमात्र मंदिर है।
देवालय लोगों की आस्था विश्वास का केंद्र होते हैं। वर्तमान मे देखरेख पंडित लालदास महंत एवं उनके अनुज कृष्णधर मिश्र कर रहे हैं अत्यंत सुखद बात है कि दो-सौं पचास वर्ष प्राचीन ऐतिहासिक महत्व के श्री जगन्नाथ मंदिर के रखरखाव की महंत श्रीलालदास महंत बिना शासकीय सहयोग से जिर्णोद्धार करवा रहे हैं उन्होंने देखा की मंदिर के नक्काशीदार मूर्तियां, नृत्य-संगीत करती महिलाएं, पूजा-अर्चना में लीन कृतियों का क्षरण हो रहा हैं, तब कुछेक दिन पहले छत पर क्रांक्रिट करवाकर, 93- वर्षीय वयोवृद्ध लालदास महंत कार्य कर रहे हैं ।
मंदिर की महत्ता के विषय में साहित्यकार शशिभूषण सोनी ने बताया कि मंदिर जिसे लोग श्रद्धा भाव से बड़े मठ के नाम से संबोधित करते हैं।
श्रद्धालुओं के लिए प्राचीन वैभव संस्कृति का खास ऐतिहासिक सांस्कृतिक विरासत की पहचान दिलाता हैं। बड़े-बड़े पत्थरों से निर्मित उत्कृष्ट कलाकृतियां गुज़रे हुए दिनों की याद दिलाती हैं, पत्थरों पर उकेरी गई कलाकृति दर्शनीय हैं । मंदिर के संत-महात्माओं के कदमों की निशान के लिए चरण-पादुकाएं पवित्रता के दर्शन-पूजन करने का सौभाग्य प्रदान करता हैं। सेवानिवृत्त प्राचार्य हरिहर प्रसाद तिवारी ने बताया कि इस विशाल मंदिर को देखने से ऐसा लगता हैं कि मानों दोनों ओर सजग प्रहरी की भांति पहरा दे रहे हैं । जिसमें क्रमशः स्वर्गीय गोपाल दास, बालकदास, सुकरामदास, रामानुजदास एवं रामचरण दास की स्मृति में ये पादुकाएं जहां एक ओर स्वर्गीय संत-महात्माओं का जीवन चरित्र स्मृतियों की ओर देखने के लिए विवश करती हैं वही चरण पादुकाएं बड़े-बड़े साधकों ओजस्वीं मठ के प्रांगण में कभी चलती थी चटचट की ध्वनि से समय के पृष्ठों पर गति ही जीवन हैं का अहृसास कराती हैं, ये पादुकाएं मरी हुई आकांक्षाओं की तरह गतिहीन होकर निर्जन-सा पड़ी हुई प्रतीत हो रही हैं । पूर्व पार्षद एवं सामाजिक कार्यकर्त्ता शशिप्रभा सोनी ने बताया कि रामनवमी पर रामजन्म उत्सव यहां दो-वर्ष से कोरोना संक्रमण से भव्य उत्सव आयोजन पर ग्रहण लगा था । सोशल-डिस्टेंशिग का पालन करते हुए प्रमुख लोगों की उपस्थिति में ही मनाया गया था इस वर्ष यह आयोजन भव्य समारोह के साथ मनाया जा रहा हैं निर्मित पाषाण मूर्ति चांपा शहर की खास पहचान की यादें दिलाती मातुश्री उर्मिला देवी बताती है मंदिर परिसर में खेले पले बढ़े, जब भी मायका आती हूं यहां से गुजरते हुए देवी-देवता मुझें आने के लिए आवाजें दे रही हैं । बिना दर्शन-पूजन करने यहां से आगे बढ़ने का मन नहीं करता । प्राचीन , अद्भुत नयनाभिराम मूर्तियां और मंदिर से जुड़ी यादें आज भी मन ही नहीं दिलों-दिमाग में बसी हुयी हैं ।