मध्यप्रदेश:- पेपर लीक की खबरें आए दिन आती रहती हैं. कभी ये खबरें सच होती हैं तो कई बार केवल स्टूडेंट्स, कैंडिडेट्स और उनके पैरेंट्स को परेशान करने के लिहाज से इन्हें फैलाया जाता है. कारण कोई भी हो लेकिन पेपर लीक की अफवाह से खासा नुकसान होता है. हाल ही में झारखंड लोक सेवा आयोग की पीसीएस प्री परीक्षा को लेकर भी अफवाह उड़ी और कैंडिडेट्स ने इसे लेकर विरोध-प्रदर्शन किया. हालांकि बोर्ड ने साफ किया है कि ये खबर झूठी है और पेपर लीक नहीं हुआ है.
होगी कार्यवाही
झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन ने कहा है कि जिन लोगों ने पेपर लीक की खबर फैलायी है उन पर कड़ी कार्यवाही की जाएगी. इन लोगों पर झारखंड प्रतियोगिता परीक्षा अधिनियम, 2023 के तहत कार्रवाई की जा सकती है. इसके अंतर्गत भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम व निवारण के उपाय के तौर पर एक्शन लिया जाता है. यहां पेपर लीक का झूठा वीडियो भी वायरल कर दिया गया था.
कितनी सजा होगी
इस अधिनियम के तहत प्रतियोगी परीक्षा में नकल करते पकड़े जाने पर एक से तीन साल तक की सजा होगी. इसके अलावा पांच लाख तक का जुर्माना देना पड़ सकता है. सजा को कम किया गया है, पहले सात साल और पांच साल की सजा का प्रावधान था जिसे पांच साल और तीन साल किया गया.
इन पर भी होगा लागू
इस अधिनियम के दायरे में परीक्षा एजेंसियां, कर्मचारियों द्वारा पेपर लीक, उनके परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों द्वारा ये काम करने पर उन्हें भी सजा मिलेगी. पहली बार पकड़े जाने पर स्टूडेंट को एक साल की सजा और पांच लाख तक का जुर्माना हो सकता है और दोबारा पकड़े जाने पर तीन साल की सजा और दस लाख का जुर्माना हो सकता है.
क्या है सजा
आमतौर पर अफवाह फैलाने पर आईटी एक्ट – 2000 के तहत तीन साल की सजा और पांच लाख का जुर्माना है. वहीं सोशल मीडिया पर दोबारा ऐसा करने पर पांच साल की सजा और दस लाख जुर्माना है.
पेपर लीक कराने वालों को विधेयक 2024 के तहत दस साल की जेल और एक करोड़ रुपये जुर्माना देना पड़ सकता है. इस कानून से कैंडिडेट्स को बाहर रखा गया है।
