नई दिल्ली:– भारत में कई तीर्थ स्थल हैं. हर जगह की अपनी खासियत है और अपनी अहमियत है. कहीं जाने से जिंदगी के सारे पाप कट जाते हैं तो कहीं जाने से सारे रोगों से मुक्ति मिल जाती है. इंसान को जैसा कष्ट होता है, उसी अनुरूप वो दर्शन के लिए जाता है. काशी को मुक्ति और मोक्ष के लिए जाना जाता है. कहा जाता है कि जिसके भी प्राण काशी में छूटते हैं, वो सीधे बैकुंठ को जाता है. इस कारण अपनी जिंदगी के आखिरी समय में कई लोग काशी को अपना ठिकाना बना लेते हैं.
काशी के कई श्मशान घाट ऐसे हैं, जहां चिता चौबीसों घंटे जलती रहती है. यहां चिता की राख ठंडी नहीं होती. लेकिन ये काफी कम लोगों को पता होगा कि काशी की धरती पर पांच लोगों की लाशें कभी नहीं जलाई जाती. इन बॉडीज को श्मशान से भी लौटा दिया जाता है. सोशल मीडिया पर एक नाविक का वीडियो शेयर किया गया, जिसने इस राज से पर्दा उठाया. उसने गंगा नदी पर खड़े होकर इस राज का खुलासा किया. आइये आपको भी बताते हैं.
गंगा नदी पर पर्यटकों को घुमाते हुए इस नाविक ने बहुत बड़ा राज खोला. उसने सबको बताया कि पांच तरह की बॉडीज को काशी में जलाने पर पाबंदी है. कोई भी इनकी लाश को अग्नि नहीं देता. इन पांच लोगों में शामिल हैं:
- इस लिस्ट में सबसे पहला नाम साधुओं का आता है.साधुओं की लाश को जलाया नहीं जाता. इनकी बॉडी को या तो जल समाधि दी जाती है या फिर थल समाधि. यानी या तो साधुओं की बॉडी को पानी में बहा दिया जाता है या फिर जमीन में दफ़न कर दिया जाता है.
- छोटे बच्चों की बॉडी को भी काशी में नहीं जलाया जा सकता. बारह साल से कम उम्र में यदि किसी बच्चे की मौत हो जाती है तो उसे जलाया नहीं जाता. बारह से कम उम्र के बच्चे भगवान का रूप माने जाते हैं. इस कारण इन्हें जलाने पर पाबंदी है.
- इस लिस्ट में तीसरे नंबर पर है प्रेग्नेंट महिलाएं. नाविक ने बताया कि इन महिलाओं का पेट फूल जाता है. ऐसे में यदि इनकी बॉडी को जलाया जाएगा तो चिता पर इनका पेट फट जाएगा और अंदर पल रहा बच्चा उछल कर ऊपर की तरफ उड़ जाएगा. ये देखने में अच्छा नहीं लगेगा. इस कारण प्रेग्नेंट महिलाओं की बॉडी को भी नहीं जलाया जाता.
- जिस इंसान की मौत सांप के काटने से होती है, उसे भी काशी में नहीं जलाया जाता. नाविक ने बताया कि ऐसा कहा जाता है कि सांप के काटने से जिसकी मौत हुई हो, उसके दिमाग में 21 दिनों तक प्राण रहता है. ऐसे में इनकी लाश को केले के तने से बांधकर पानी में बहा दिया जाता है. इसके पीछे मान्यता है कि अगर किसी तांत्रिक की नजर इस लाश पर पड़ जाती है तो वो उसे जिंदा कर सकता है. इस कारण इनकी बॉडी को जलाया नहीं जाता.
- इसके अलावा चर्म रोग या कुष्ट रोग के मरीज की मौत होने पर भी उसकी लाश को काशी में नहीं जलाया जाता. बताया जाता है कि इनकी बॉडी को अगर जलाया जाता है तो बिमारी के बैक्टेरिया हवा में फ़ैल जाते हैं और इससे अन्य लोग भी इस रोग की चपेट में आ सकते हैं. इसी कारण से इनकी लाश को काशी में जलाने पर बैन है.
