नई दिल्ली :- हैदराबाद की एक स्टार्ट अप कंपनी हार्वेस्टिंग रोबोटिक्स ने एक कुत्ते को चीफ हैप्पीनेस ऑफिसर नियुक्त किया है. कंपनी ने ऐसा क्यों किया, इस पर बहस चल रही है. कंपनी के को-फाउंडर राहुल अरेपाका ने कहा कि वह इसके जरिए अपने सभी कर्मचारियों को खुशी का पल देना चाहते हैं. उन्होंने इसकी जानकारी लिंकडिन पर पोस्ट करके दी.
उन्होंने लिखा, “मिलिए मेरे नए दोस्त डेनवर नाम के एक गोल्डन रिट्रीवर से, जिन्हें चीफ हैप्पीनेस अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया है. जी हां, ये न तो किसी की केयर करेंगे और न ही किसी प्रकार की कोडिंग करेंगे. वह सिर्फ दफ्तर आएंगे और आपके दिल को चुराएंगे, आपको ऊर्जा देते रहेंगे. आपको खुश रखने में अपनी भूमिका निभाएंगे.”
इस कंपनी का नाम है – अरेपाका. कंपनी रोबोटिक्स क्षेत्र में काम कर रही है. अरेपाका के प्रोडक्ट्स किसानों की मदद करने के लिए बनाए जा रहे हैं. राहुल ने बताया कि उनकी कंपनी के प्रोडक्ट नए तरीके से खेती करने में किसानों की मदद करेंगे. उन्होंने कहा कि वह लेजर वीडिंग तकनीक का उपयोग करने जा रहे हैं.
चीफ हैप्पीनेस अधिकारी की नियुक्ति को लेकर जो कुछ भी उन्होंने पोस्ट किया है, उस पर कई लोगों ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं. कुछ ने तारीफ की है, तो कुछ ने तंज भी कसा. एक यूजर ने लिखा, चीफ हैप्पीनेस ऑफिसर सभी को खुश करने की जिम्मेदारी से थक गया है. एक अन्य व्यक्ति ने लिखा, “चार पंजे, जीरो तनाव और सौ फीसदी पूंछ हिलाने वाली सकारात्मकता ! शानदार पहल.”
आपको बता दें कि पेट एनिमल्स (पालतू जानवर) को लेकर धीरे-धीरे ऑफिस का माहौल बदल रहा है. कई कंपनियों ने इसको लेकर अपने नियमों में ढील दी है. पहले किसी भी पेट एनिमल को ऑफिस लाने की अनुमति नहीं दी जाती थी, लेकिन अब कंपनियां अपनी सोच बदल रही हैं. आमेजन, गूगल और जप्पोस जैसी कई कंपनियां लंबे समय से काम पर पालतू जानवरों को रखने की अनुमति दे रही हैं. यह ग्लोबल ट्रेंड का हिस्सा बनता जा रहा है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जो भी इस तरह की सोच रखते हैं, उनका यह कहना है कि ऐसा करने से लोगों में तनाव की कमी आती है. वे यह मानते हैं कि जानवरों की उपस्थिति तनाव को कम कर सकती हैं, वह सामाजिक संपर्क को बढ़ाने में मदद करते हैं तथा ऑफिस में प्रोडक्टिविटी भी बढ़ती है.
इस संबंध में ह्युमन एनिमल बॉंडिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट ने एक शोध भी किया है. उन्होंने आंकड़ों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला है कि पेट फ्रेंडली ऑफिस में काम करने वाले 87 फीसदी कर्मचारियों के उसी कंपनी में बने रहने की अधिक संभावना होती है तथा 91फीसदी कर्मचारी अपने काम में अधिक ध्यान लगा पाते हैं.