देहरादून:- उत्तराखंड सरकार ने उत्तराखंड योग नीति 2025 तैयार की है. जिसे धामी मंत्रिमंडल ने 28 मई 2025 को मंजूरी दे दी है. ये नीति देश की पहली योग नीति है. इस योग नीति को उत्तराखंड को योग और वेलनेस की वैश्विक राजधानी बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है. इस नीति का उद्देश्य योग को सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक और पर्यटन आधारित मॉडल के रूप में विकसित करने का है. यही नहीं, इस योग नीति के जरिए लक्ष्य रखा गया है कि साल 2030 तक उत्तराखंड में कम से कम पांच नए योग हब स्थापित किए जाएंगे. आखिर क्या है योग नीति? क्या है इसकी खासियत?
उत्तराखंड के कण- कण में देवी देवता वास करते हैं. यही वजह है कि उत्तराखंड को देवभूमि के नाम से जाना जाता है. उत्तराखंड को भारत की आध्यात्मिक और योग परंपरा की भूमि भी माना जाता है. यह सदियों से ऋषियों, मुनियों और साधकों की तपस्थली भी रही है. जिसके चलते उत्तराखंड के ऋषिकेश को विश्व योग की राजधानी कहा जाता है. ऐसे में अब उत्तराखंड सरकार देवभूमि उत्तराखंड को योग और वैलनेस की वैश्विक राजधानी बनाने पर जोर दे रही है. जिसके तहत राज्य सरकार ने राज्य ही नहीं बल्कि देश की पहली योग नीति ” उत्तराखंड योग नीति 2025″ तैयार की है. जिसे 28 मई को धामी कैबिनेट ने मंजूरी दी है.
उत्तराखंड की खूबसूरत वादियां और चारधाम, प्रदेश की खूबसूरती और आस्था में चार चांद लगाती रही हैं. अब सरकार योग नीति के जरिए देवभूमि को योगभूमि के रूप में विकसित करने जा रही है. जिसके तहत उत्तराखंड को योग, वैलनेस, आयुष के क्षेत्र में सुनियोजित तरीके से विकसित किया जाएगा. जिससे न सिर्फ देश बल्कि दुनिया भर के पर्यटकों को उत्तराखंड की ओर आकर्षित किया जा सकेगा. वर्तमान समय ने उत्तराखंड का ऋषिकेश पहले ही योग नगरी के रूप में देश दुनिया में मशहूर है. यहां अनेकों योग आश्रम हैं. जिनमें विदेशी सैलानी योग सीखने आते हैं. ऋषिकेश के अलावा, कौसानी, चम्पावत जैसे स्थान भी कई दशकों से योग साधना के प्रमुख केन्द्र हैं.
साल 2023 में आयुष नीति लागू होने के बाद आयुष विभाग ने साल 2023 में ही योग पॉलिसी तैयार करने की कवायद शुरू की थी. आयुष विभाग ने योग नीति का प्रारंभिक ड्राफ्ट तैयार कर शासन को प्रशिक्षण के लिए भी भेजा था, लेकिन ड्राफ्ट में कुछ कमियां होने के चलते शासन से वापस भेज दिया था. जिसके बाद आयुष विभाग ने शासन के दिशा निर्देशों के अनुसार, देश की पहली योग नीति तैयार की. इस योग नीति को तैयार करने में आयुष विभाग ने आयुर्वेद विशेषज्ञों के साथ ही तमाम हितधारकों से भी सुझाव लिया. आयुष विभाग की ओर से करीब 2 साल में योग नीति तैयार की गई. जिसे मई 2025 में विधायी विभाग से मंजूरी मिलने के बाद 28 मई को कैबिनेट के सामने रखा. जिसे धामी मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी है.
देश की पहली योग नीति का उद्देश्य: उत्तराखंड योग नीति से जनता का स्वास्थ्य संवर्धन के साथ ही उत्तराखंड में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा. योग नीति के तहत योग निदेशालय की स्थापना की जाएगी. योग संस्थानों के लिए नियम और दिशा-निर्देश बनाए जाएंगे. उत्तराखंड राज्य को योग और वैलनेस की वैश्विक राजधानी के रूप में स्थापित करेगी. उत्तराखंड को सशक्त और विकसित राज्य बनाने में इस नीति का सहयोग मिलेगा. योग नीति लागू होने के बाद देश के योग की आध्यात्मिक विरासत को संरक्षण मिलेगा. शिक्षा में योग का एकीकरण हो सकेगा. योग ध्यान केंद्रो को बढ़ावा मिलेगा. योग एवं आध्यात्म में रिसर्च को भी इससे प्रोत्साहन मिलेगा. उत्तराखंड में योग, आध्यात्म और पर्यटन का भी विकास होगा. योग नीति के तहत योग प्रशिक्षक केंद्रों की स्थापना की जाएगी. योग प्रशिक्षित का रजिस्ट्रेशन और योग संबंधित इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवेलप किया जाएगा. उत्तराखंड योग नीति के तहत योग को प्रोत्साहित करने के लिए तमाम सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी. स्कूलों में योग पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे. आम जनता, स्कूली बच्चों एवं कॉलेज में लाइव योग का प्रसारण किया जाएगा. योग नीति से प्रदेश के 13 हज़ार लोगों को योग प्रशिक्षक, योग अनुदेशक के रूप में लाभ मिलेगा. होटल, रिसॉर्ट, होमस्टे, स्कूल, कॉलेज और कॉरपोरेट सेक्टर में योग सत्र चलाए जाएंगे.
योग नीति के तहत तय किए गए लक्ष्य: उत्तराखंड योग नीति 2025 के तहत सरकार ने तमाम लक्ष्य भी तय किए हैं. जिसके तहत साल 2030 तक उत्तराखंड में कम से कम पांच नए योग हब स्थापित किए जाएंगे. जिसमें जागेश्वर, मुक्तेश्वर, व्यास घाटी, टिहरी झील और कोलीढेक झील शामिल है. इसके साथ ही मार्च 2026 तक राज्य के सभी आयुष हेल्थ और वेलनेस सेंटर्स में योग सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी. समुदाय-आधारित माइंडफुलनेस कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे, जो अलग-अलग आयु, लिंग और वर्ग की ज़रूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किए जाएंगे. प्रदेश में संचालित सभी योग संस्थानों का रजिस्ट्रेशन किया जाएगा. एक विशेष ऑनलाइन योग प्लेटफार्म शुरू किया जाएगा. योग पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रचार अभियान और अंतरराष्ट्रीय योग सम्मेलनों का आयोजन किया जाएगा. साथ ही मार्च 2028 तक 15 से 20 राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ भागीदारी विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है.
नए योग केंद्र खोलने के लिए सब्सिडी का प्रावधान: योग, ध्यान और प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में शोध को प्रोत्साहित करने के लिए 10 लाख रुपए तक प्रति परियोजना का अनुदान दिया जाएगा. ये सुविधा विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों, स्वास्थ्य संगठनों, आयुष संस्थाओं और एनजीओ के लिए होंगी. कुल मिलाकर नीति अवधि में 1 करोड़ तक की राशि अनुसंधान के लिए रखा गया है. राज्य में पहले से चल रहे होमस्टे, रिसॉर्ट, होटल, स्कूल, कॉलेज आदि में अगर योग केंद्र बनाए जाते है तो नियोजित होने वाले योग अनुदेशक के लिए हर सत्र के अनुसार 250 तक की मुआवजा उस संस्था को दी जाएगी, प्रति केंद्र में एक अनुदेशक के लिए हर महीने 20 सत्रों के लिए मुआवजा दिया जाएगा.
उत्तराखंड सरकार, योग और प्राकृतिक चिकित्सा निदेशालय की स्थापना करेगी, जो नीति के सचालन, नियमन, अनुदान वितरण और तमाम गतिविधियों की निगरानी करेगा. निदेशालय में एक निदेशक, संयुक्त निदेशक, उपनिदेशक, योग विशेषज्ञ, रजिस्ट्रार और अन्य आवश्यक स्टाफ शामिल होंगे. निदेशालय का कार्य योग केंद्रों की गुणवत्ता को सुनिश्चित करना, योग संस्थानों का रजिस्ट्रेशन और योग प्रमाणन बोर्ड के तहत मान्यता प्राप्त करवाना, योग केंद्रों की रेटिंग प्रणाली बनाना और एमओयू के जरिए राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सहयोग स्थापित करना होगा.
नीति की समीक्षा और निगरानी के लिए एक उच्च स्तरीय राज्य समिति का गठन किया जाएगा. नीति को बेहतर ढंग से लागू करने के लिए राज्य सरकार अगले पांच सालों में करीब 35 करोड़ रुपए खर्च करेगी. इसमें योग केंद्रों के लिए 25 करोड़ रुपए, रिसर्च के लिए 1 करोड़ रुपए, शिक्षक रजिस्ट्रेशन के लिए 1.81 करोड़ रूपये और मौजूदा संस्थानों में योग सत्रों के संचालन के लिए सहयोग देने के रूप में 7.5 करोड़ रुपए खर्च करेगी. राज्य सरकार का मानना है कि योग नीति लागू होने के बाद उत्तराखंड राज्य में करीब 13000 से अधिक रोजगार उपलब्ध होंगे. 2500 योग शिक्षकों के लिए योगा सर्टिफिकेशन बोर्ड से प्रमाणित होंगे. 10,000 से अधिक योग अनुदेशकों को होमस्टे, होटल आदि में रोजगार मिलने की संभावना है.
