अंतरिम बजट घोषणा से पहले, वित्त मंत्रालय ने भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने आने वाली चार चुनौतियाँ बताई हैं, जिनमें सर्विस सेक्टर के लिए आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का खतरा, एनर्जी सिक्योरिटी और इकोनॉमिक ग्रोथ के बीच संतुलन और स्क्ल्डि वर्कफोर्स की अवेलेबिलिटी शामिल है. बजट से पहले जारी होने वाली इकोनॉमिक सर्वे से अलग सरकार ने एक और रिपोर्ट जारी की है. जिसका टॉमिक “द इंडियन इकोनॉमी: ए रिव्यू” है.
1 फरवरी को जारी होने वाला बजट अंतरिम या यूं कहें लेखानुदान बजट है, पूरी इकोनॉमिक सर्वे की रिपोर्ट अप्रैल-मई 2024 में होने वाले आम चुनावों के बाद फुल बजट से पहले जारी किया जाएगा. मंत्रालय ने कहा कि देश अगले छह से सात वर्षों में यानी 2030 तक 7 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बन सकता है. वहीं इस दौरान इंडियन इकोनॉमी के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं.भारत की ग्रोथ ग्लोबल सिनेरियो पर निर्भरभारतीय अर्थव्यवस्था के सामने आने वाली चुनौतियों का उल्लेख करते हुए, वित्त मंत्रालय ने कहा कि तेजी से इंटीग्रेटिड ग्लोबल इकोनॉमी के युग में, भारत का ग्रोथ आउटलुक डॉमेस्टिक परफॉर्मेंस पर नहीं बल्कि ग्लोबल डेवलपमेंट्स के स्पिलओवर इफेक्टस पर डिपेंड करता है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि बढ़ते जियो इकोनॉमिक फ्रेगमेंटेशन और हाइपर ग्लोबलाइजेशन की मंदी की वजह से फ्रेंड शोरिंग और ऑनशोरिंग में इजाफा होने की संभावना है, जिसका पहले से ही ग्लोबल ट्रेड और बाद में ग्लोबल ग्रोथ पर असर देखने को मिल रहा है. आइए आपको भी मिनिस्ट्री की ओर से जारी की गई चुनौतियों के बारे में विस्तार से जानकारी देते हैं. सरकार ने कहा कि सर्विस सेक्टर के रोजगार पर संभावित प्रभाव के कारण आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की एंट्री दुनिया भर की सरकारों के लिए एक बड़ी चुनौती है.
यह भारत के लिए विशेष रुचि का विषय है क्योंकि सेवा क्षेत्र भारत की जीडीपी में 50 प्रतिशत से अधिक का योगदान देता है.जलवायु परिवर्तन का मुद्दादुनिया भर में पॉलिसी मेकर्स जलवायु परिवर्तन का मुद्दा काफी अहम हो गया है. ऐसे में विकासशील देश अपने कार्बन टारगेट और इकोनॉमी को विकसित करने की भूख को लेकर सवालों के घेरे में आ गए हैं. नेट जीरो टारगेट के तहत, भारत 2070 तक पूरी तरह से रिन्युएबल एनर्जी पर स्विच करने के लिए सहमत हो गया है. एनर्जी सिक्योरिटी और इकोनॉमिक ग्रोथ बनाम एनर्जी ट्राजिशन के बीच ट्रेड—ऑफ मल्टीफेसिट इश्यू है. जिसके जियो पॉलिटिक्स, टेक्नोलॉजिकल, फिस्कल, इकोनॉमिक और सोशल जैसे कई डायमेंशंस हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि अलग-अलग देशों द्वारा अपनाई जा रही पॉलिसी दूसरी इकोनॉमीज को प्रभावित कर रही हैं
प्रोडक्टिव वर्कफोर्सइन सब के साथ सरकार इंडस्ट्री में प्रतिभाशाली और “उचित” स्क्ल्डि वर्कफोर्स की अवेलेबिलिटी को भी इकोनॉमिक ग्रोथ के लिए एक चुनौती के रूप में देखती है. रिपोर्ट के अनुसार एक स्वस्थ, शिक्षित और कुशल जनसंख्या आर्थिक रूप से प्रोडक्टिव वर्कफोर्स में इजाफा करती है. मंत्रालय ने कहा कि वित्त वर्ष 2024 में भारतीय अर्थव्यवस्था 7 प्रतिशत या उससे अधिक बढ़ने की संभावना है. कुछ विश्लेषकों ने अनुमान लगाया है कि वित्त वर्ष 2025 में भी इसी तरह की विकास दर हासिल की जा सकती है. रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर वित्त वर्ष 2025 के लिए पूर्वानुमान सही साबित होता है,
