मौजूदा समय में इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल के दाम 80 डॉलर प्रति बैरल के आसापास है. कुछ दिन पहले ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 75 डॉलर प्रति बैरल से भी कम हाे गई थी. इंडियन बास्केट की कीमत भी काफी समय से 80 डॉलर प्रति बैरल से कम ही देखने को मिली है्. ऐसे में देश की नरेंद्र मोदी मोदी सरकार गर्मियों में होने वाले आम चुनावों से पहले भारतीय उपभोक्ताओं को राहत देने और पेट्रोल और डीजल को सस्ता करने पर विचार कर सकती है.वास्तव में केंद्र में लगातार तीसरी बार सत्ता हासिल करने की कोशिश कर रही भारतीय जनता पार्टी पर पेट्रोल और डीजल को सस्ता करने का लगातार दबाव बन रहा है.
ताकि आम लोगों की जेब में पैसे की बचत हो सके और महंगाई पर थोड़ी लगाम लगाई जा सके. मोैजूुदा समय में दिसंबर में महंगाई के आंकड़ें चार महीने के हाई पर पहुंचते हुए 5.69 फीसदी पर आ गए थे. यही महंगाई पीएम मोदी और उनकी सरकार के चिंता का विषय है. कीमतों को कंट्रोल करने के लिए सरकार ने निर्यात प्रतिबंध लागू किए हैं. साथ ही कई प्रोडक्ट्स के स्टोरेज कैप लगा दिया है.क्या सस्ता हो सकता है पेट्रोल और डीजल?सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियां जो बाजार के 90 फीसदी हिस्से को कंट्रोल करती हैं, सितंबर 2023 के बाद से तेल की कीमतों में तेज गिरावट की वजह से अच्छे दिन देख रही हैं।
रेटिंग एजेंसी आईसीआरए ने कहा कि इस तेज गिरावट ने ओएमसी के मार्केटिंग मार्जिन को पेट्रोल 11 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर डीजल पर 6 रुपये प्रति लीटर बढा दिया है. इससे पहले फरवरी 2022 में यूक्रेन रूस वॉर की वजह से कच्चे तेल के दाम रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच गए थे. जिसका असर ये हुआ था कि ऑयल कंपनियाें को इस मार्जिन में डबल डिजिट का नुकसान होने लगा था.
पेट्रोल डीजल सस्ता करने का अनुकूल समयआंकड़ों से पता चलता है कि ग्लोबल मार्केट में तेल की कीमतें उम्मीदों के विपरीत अनुकूल बनी हुई हैं। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी ने अपनी फ्रेश मंथली ऑयल रिपोर्ट में इस वर्ष ग्लोबल लेवल पर तेल की सप्लाई डिमांड से अधिक होने का अनुमान लगाया है. खास बात तो ये है चुनाव के बाद देश में मई 2024 तक सरकार का गठन हो चुका होगा और नई सरकार के पास अगले 12 महीनों तक पेट्रोल और डीजल की कीमतों को और कम करने का भी मौका होगा.
क्यों कम हो रही है कच्चे तेल की कीमत?गुरुवार को ब्रेंट 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। ऑयल मार्केटिंग कपंनियों के प्रॉफिट में आने की प्रमुख वजह बीते कई महीने से कच्चे तेल के दाम 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे रहना है. डिमांड में कमी और लीबिया के साथ नॉर्वे में प्रोडक्शन में इजाफे की वजह से कच्चे तेल की कीमत में कमी आ रही है. इन फैक्टर्स ने, कुछ हद तक, मिडिल ईस्ट की टेंशन की वजह से संभावित महंगाई को कंट्रोल किया हुआ है.जब 100 डॉलर के पार थे कच्चे तेल के दामरूस-यूक्रेन वॉर के कारण कच्चे तेल के प्रभाव को कम करने के लिए केंद्र की दूसरी उत्पाद शुल्क कटौती के बाद मई 2022 से पेट्रोल और डीजल की की कीमतों में कोई बदलाव देखने को नहीं मिला था.
उस समय कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा हो गई थी. जिसके बाद ऑयल कंपनियों को नुकसान होना शुरू हो गया था. एचपीसीएल, बीपीसीएल और आईओसीएल को जुलाई और सितंबर 2023 के बीच और फिर अक्टूबर के बाद मुनाफा होना शुरू हुआ. पिछले नुकसान की भरपाई के लिए पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने के बाद भी ओएमसी ने पंप की कीमतों में कटौती नहीं की।
