नई दिल्ली:– जीडीपी के लिए अभी आधार वर्ष 2011-12 है और एक सलाहकार समिति ने 2020-21 को नए आधार वर्ष के रूप में अनुशंसित किया था। अब सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने नेशनल अकाउंट्स के लिए बेस ईयर के संशोधन के लिए 26 सदस्यीय पैनल के गठन की अधिसूचना जारी की है। इंस्टीट्यूट ऑफ इकनॉमिक ग्रोथ के पूर्व प्रोफेसर Biswantah Goldar की अध्यक्षता वाले पैनल को मौजूदा डेटाबेस की समीक्षा करने और नेशनल अकाउंट्स के अनुमानों में सुधार के लिए नए डेटा स्रोतों को शामिल करने पर सलाह देने का काम सौंपा गया है। अधिसूचना में कहा गया है कि इस समिति का उद्देश्य आर्थिक विश्लेषण और नीति के प्रयोजनों के लिए राष्ट्रीय लेखा सांख्यिकी के संकलन और प्रस्तुति के लिए कार्यप्रणाली पर सलाह देना है।
पैनल नेशनल अकाउंट्स के लिए आधार वर्ष और थोक मूल्य सूचकांक, उत्पादक मूल्य सूचकांक, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक, औद्योगिक उत्पादन सूचकांक जैसे अन्य संबंधित प्रॉडक्ट्स के साथ इसके अलाइनमेंट पर भी सलाह देगा। पैनल को संयुक्त राष्ट्र के ताजा मानकों के कार्यान्वयन और यूएन स्टैटिस्टिक्स डिवीजन द्वारा अनुशंसित नए वर्गीकरण को अपनाने पर भी सलाह देने को कहा है। इस समिति का कार्यकाल पांच वर्ष या नेशनल अकाउंट्स के अगले आधार वर्ष संशोधन के पूरा होने तक, जो भी बाद में हो, होगा। अधिसूचना के अनुसार परिचालन व्यवहार्यता के लिए समिति अधिकतम दो वर्ष के कार्यकाल के साथ विभिन्न पहलुओं पर उप समितियों का गठन कर सकती है।
ये हैं पैनल में
पैनल के अन्य प्रमुख सदस्यों में सीएसओ के पूर्व महानिदेशक जी सी मन्ना, इंस्टीट्यूट ऑफ इकनॉमिक ग्रोथ के निदेशक चेतन घाटे, एनआईबीएम पुणे के निदेशक पार्थ रे, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के आर्थिक अध्ययन और योजना केंद्र के प्रोफेसर सुब्रत गुहा, दिल्ली स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स की प्रोफेसर मौसमी दास, आईआईटी कानपुर के गणित और सांख्यिकी विभाग के डीन शलभ, हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के सांख्यिकी विभाग के प्रोफेसर रंजन कुमार साहू, जीएसटीएन के सीईओ, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय और एनएसएस के महानिदेशक और अन्य शामिल हैं।
