नई दिल्ली:– केदारनाथ मंदिर के कपाट 2 मई को भक्तों के लिए खुलने जा रहे हैं। केदारनाथ मंदिर को लेकर हिंदुओं में कई मान्यताएं हैं। ऐसा कहा जाता है कि केदारनाथ में स्थित ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने से व्यक्ति के लिए मोक्ष के द्वार खुलते हैं। यह मंदिर 6 महीने तक बंद रहता है और महज 6 महीने ही यहां भक्त दर्शन कर पाते हैं लेकिन, जब मंदिर बंद रहता है उस समय भी मंदिर के अंदर दीपक खुद-ब-खुद जलता रहता है। आखिरी कौन उन 6 महीनों के दौरान मंदिर के अंदर पूजा करता है। ऐसी ही इस मंदिर से जुड़े कई रहस्य शिवपुराण में बताए गए हैं। आइए जानते हैं केदारनाथ मंदिर से जुड़े कुछ हैरान कर देने वाले रहस्य…
केदारनाथ जहां आरंभ और अंत एक साथ आकर मिलते हैं। जहां भगवान शिव के होने का एहसास मिलता है। जहां दुखी मन को शांति मिलती है और मुक्ति के द्वार का मार्ग आरंभ होता है। शिव पुराण की कोटि रुद्र संहिता में वर्णन मिलता है। जो मनुष्य केदारनाथ की यात्रा भाव से जा रहा है और मार्ग पर चलते समय किसी कारण उसकी मृत्यु हो जाती है तो उसे भी मोक्ष की प्राप्ति होती है। केदारनाथ की महिमा सिर्फ इतनी ही नहीं है शिवपुराण के अनुसार, जो मनुष्य केदारनाथ के दर्शन करता है और वहां मौजूद कुंड का जल पान करता है वह भी जीवन मृत्यु के चक्र से मुक्ति हो जाता है। आइए उस केदारेश्वर भगवान शिव के परम धाम केदारनाथ के उन रहस्यों को जानते हैं जो जीव आत्मा को मुक्ति प्रदान करता है। जानें केदारनाथ के अनकहे रहस्यों को जानते हैं…
कहां स्थित है केदारनाथ
भगवान शिव को समर्पित केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित है। केदारनाथ 12 ज्योतिर्लिंग में से एक है। साथ ही पंच केदार में से भी एक है। शिवपुराण के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण पांडवों के पौत्र महाराज जनमेजय ने कराया था। यहां स्वयंभू शिवलिंग है। साथ ही इस मंदिर का जीर्णोद्धार आदि शंकराचार्य ने कराया था।
केदारनाथ के तीर्थ पुरोहित इस क्षेत्र में उनके पूर्वज भगवान नर नारायण और दक्ष प्रजापति के समय से यहां पूजा करते आए हैं। उन्हें यहां पूजा करने का अधिकार पांडवों के पौत्र राजा जनमेजय ने किया था। साथ ही संपूर्ण केदार क्षेत्र भी उन्हें दान में दे दिया था। केदारनाथ के जो मुख्य पुजारी शंकराचार्य के वंशज है जो कर्नाटक के वीराशैवा समुदाय से तालुख रखते हैं। जिन्हें रावल नाम से पुकारा जाता है। केदारनाथ के मुख्य पुजारी रावल होने के बाद भी वह वहां पूजा नहीं कराते हैं। वह दूसरों पुजारियों को निर्देश देकर पूजा कराते हैं।
