नई दिल्ली:- इंडियन रेलवे दुनिया का सबसे बड़ा चौथा रेल नेटवर्क है. यहां रोजाना लाखों की संख्या में यात्री ट्रेन से सफर करते हैं. यही वजह है कि देश में प्रतिदिन 1300 से अधिक ट्रेनें चलाई जाती हैं, जो विभिन्न राज्यों से गुजरती हैं. रेलवे देश की अर्थव्यवस्था का अहम साधन है. वहीं देश में छोटे-बड़े हजारों रेलवे स्टेशन हैं. लेकिन हम आपको को जिस स्टेशन के बारे में बताने जा रहे हैं उसका आधिकारिक रूप से आज तक कोई नाम ही नहीं है, यानी यह एक बेनाम रेलवे स्टेशन है.
इतना ही नहीं आश्चर्य की बात यह है कि यहां प्लेटफॉर्म भी है और ट्रेन भी रुकती है, लेकिन इस स्टेशन का नाम नहीं है. यह जानकर अजीब जरूर लगता है, लेकिन यह बिल्कुल सच है. वहीं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले स्टूडेंट को इस प्रश्न का उत्तर जरूर जानना चाहिए और जनरल नॉलेज के हिसाब से भी इसका जवाब पता होना जरूरी है.
स्टेशन के नामकरण नहीं होने की वजह
बता दें कि यह रेलवे स्टेशन पश्चिम बंगाल में स्थित है जो कि बर्धमान शहर से करीब 35 किलोमीटर दूर स्थित है. खास बात यह भी है यह वर्ष 2008 से ही बिना नाम के ऑपरेशनल है. यहां प्रतिदिन ट्रेन भी रुकती है. वहीं यात्री चढ़ते और उतरते हैं, लेकिन इसका कोई नाम नहीं है. इस अनोखे रेलवे स्टेशन का नाम नहीं होने के पीछे “रैना” और “रैनागर” घर गांव के बीच का आपसी विवाद बताया जाता है. भारतीय रेलवे द्वारा जब यहां पर स्टेशन बनाया गया, तब “रैनागर” नाम रखा गया, लेकिन स्थानीय लोगों ने इसको लेकर आपत्ति जताई और बोर्ड से नाम बदलने की मांग की. फलस्वरूप मामला कोर्ट में चला गया, तभी से यह स्टेशन बिना नाम के ही चल रहा है.
रविवार के दिन नहीं आती कोई ट्रेन
गौरतलब कि इस स्टेशन पर केवल बांकुड़ा-मसाग्राम पैसेंजर ट्रेन ही रुकती है. वहीं रविवार के दिन यहां पर कोई ट्रेन नहीं आती, क्योंकि तब स्टेशन मास्टर अगले सप्ताह की बिक्री के लिए टिकट खरीदने के लिए बर्धमान शहर जाते हैं. हालांकि, यहां बेचे जाने वाले टिकटों पर पुराना नाम “रैनागर” ही छपा हुआ होता है.