नई दिल्ली:- आपने कभी सोचा है कि पेटेंट लेने का भी कोई शौक हो सकता है? अगर नहीं, तो आइए जानते हैं एक ऐसे दंपति के बारे में, जिन्हें पेटेंट लेने का इतना चस्का है कि वे हर समस्या का समाधान ढूंढने में लगे रहते हैं। ये हैं पटना के बरूण कुमार शाही और मीनाक्षी कुमारी, जो पेशे से बिजनेसमैन हैं, लेकिन दिल से आविष्कारक। इन्होंने अब तक पांच पेटेंट हासिल किए हैं और चार और प्रक्रिया में हैं। इनके आविष्कारों में से कुछ तो कोरोना काल में बहुत काम आए हैं। आइए जानते हैं इनकी कहानी उन्हीं की जुबानी।
कोरोना के समय हुई शुरुआत
बरूण बताते हैं कि उनके पास कोई टेक्निकल डिग्री नहीं है, लेकिन उन्हें हमेशा से ही नई चीजें बनाने का शौक रहा है। वे जब भी कोई समस्या देखते हैं, तो उसका समाधान खोजने में लग जाते हैं। उन्होंने 2019 में एक रिसर्च पर काम करते हुए आईआईटी पटना से जुड़ा। उन्हें बताया गया कि कोविड से जुड़े रिसर्च करने की जरूरत है। तब उन्होंने एक टर्नल का डिजाइन बनाया, जिसमें जाते ही किसी भी प्रकार के संक्रमण वाले बीमारी के चैन को तोड़ सकते हैं। इस मशीन को लेकर जून 2020 में उन्हें पहला पेटेंट मिला। इस मशीन की सराहना एम्स के साथ-साथ कई संस्थानों ने की। उसके बाद से अब तक वे इनोवेशन का यह सफर जारी रख रहे हैं। पत्नी का रहा है भरपूर सहयोग बरूण के इनोवेशन के इस सफर में उनकी पत्नी मीनाक्षी ने भी उनका पूरा साथ दिया है। वे घर का सारा काम करने के साथ-साथ उनके बिजनेस को भी संभालती हैं, ताकि बरूण का सारा ध्यान खोज पर लगा रहे। वे रिसर्च में भी उनकी मदद करती हैं। मीनाक्षी बताती हैं कि उन्हें भी काम करने में अच्छा लगता है। बरूण कहते हैं कि किसी भी काम में अगर चार हाथ लग जाएं, तो सफलता जल्दी मिलती है। पत्नी का भी उनके इनोवेशन की दुनिया में रोल है।
समस्या का समाधान ढूंढना है लक्ष्य
बरूण का लक्ष्य है कि वे लोगों के समस्याओं का समाधान इनोवेटिव रूप में निकालें। वे कहते हैं कि वे कोई भी काम कर रहे हों, लेकिन उस काम में उन्हें दिक्कत आ रही हो, तो वे कुछ ऐसा डिजाइन करेंगे, जिससे उनके समस्या का समाधान हो जाएगा। इसी सोच के साथ वे आगे बढ़ रहे हैं। वे कोशिश कर रहे हैं कि साल खत्म होते-होते 15 पेटेंट सर्टिफिकेट हाथों में आ जाएं।
