नई दिल्ली:- पहले और दूसरे चरण की चुनावी प्रक्रिया पूरी हो गई है। हालांकि मतदान के पांच चरण शेष हैं। ऐसे में सभी का यह दायित्व बनता है कि वे मतदान की प्रक्रिया में बढ़-चढ़कर भागीदारी सुनिश्चित करें और सही व सक्षम प्रत्याशी के लिए मतदान करें।
अच्छे नेता के चयन से ही देश को उन्नति के पथ पर ले जाने वाली सरकार का भविष्य तय होगा। जानिए चुनाव और मतदान को लेकर देश की कुछ प्रमुख नारी शक्तियों के विचार।
जिंदल ग्रुप की चेयरपर्सन एवं पूर्व मंत्री सावित्री जिंदल का कहना है, ‘लोकतंत्र में मतदान की अपनी अलग महत्ता है। एक मत देश को आगे बढ़ा सकता है। मतदान का सही प्रयोग सामाजिक परिवर्तन का शक्तिशाली माध्यम है।
हमारा मत तय करता है कि लोकनीतियां निर्धारित वाली संसद में आपका प्रतिनिधित्व कौन करेगा। ये प्रतिनिधि ही जनता और देश का भाग्य तय करते हैं। इसलिए मतदान करना देश के नागरिकों का एक अनिवार्य कर्तव्य है।
वह आगे कहती हैं, कोई भी राजनीतिक दल या व्यक्ति चुनाव में उतरता है तो अपने कुछ मूल्य जनता के सामने रखता है। उन मूल्यों के आधार पर ही मतदान के माध्यम से समाज में बदलाव लाए जा सकते हैं। मतदान और चुनाव लोकतंत्र के दो पहिये हैं।
मतदान मौलिक अधिकार है, जिसके माध्यम से समाज और देश के प्रति अपना सहयोग और संबंध प्रदर्शित करते हैं। मतदान चुनावी फैसलों के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण मंच होता है, जो समाज को आगे बढ़ाने में मदद करता है और निर्णय लेने की प्रक्रिया को पूरा करता है।
मतदान का सही और सकारात्मक प्रयोग करके देश को विकसित राष्ट्र बनाने में मदद मिल सकती है। हम मतदान द्वारा उन लोगों को अपना प्रतिनिधि बना सकते हैं, जो हमारे विचारों, मूल्यों और आवश्यकताओं को समझते और सम्मान देते हैं। मतदान के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भागीदारी बढ़ाई जा सकती है और उन्हें राजनीतिक रूप से सक्रिय बनाया जा सकता है साथ ही बड़े निर्णयों में उनकी राय ली जा सकती है।
कथावाचिका व आध्यात्मिक वक्ता, देवी चित्रलेखा का कहना है, देश के एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में अपने उत्तरदायित्व को समझते हुए मतदान करना बहुत महत्वपूर्ण भी है और जरूरी भी है।
यह न केवल हमारे लिए एक अधिकार है, बल्कि यह हमारी जिम्मेदारी भी है। मतदान करके हम अपनी आवाज उठा सकते हैं और राजनीतिक प्रक्रिया में भागीदारी दिखा सकते हैं। इससे सामाजिक और राजनीतिक संरचना में सकारात्मक परिवर्तन लाने का मार्ग खुलता है।
मेरा यह भी मानना है कि चुनाव और मतदान लोकतंत्र के मौलिक स्तंभ हैं। यह एक सामाजिक प्रक्रिया है जिसमें नागरिकों को सशक्तीकरण का माध्यम प्रदान किया जाता है।
चुनावी प्रक्रिया एक तरह का सार्वभौमिक समर्थन और सहमति का प्रतीक है, जो विभिन्न विचारों व धार्मिकताओं के बावजूद एकता और सहमति को प्रकट करता है। चुनाव और मतदान से संवैधानिक और लोकतांत्रिक तंत्र को मजबूती मिलती है। चुनावी प्रक्रिया राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देती है।
मैं यह विश्वासपूर्वक कहना चाहूंगी कि मतदान के सही प्रयोग और देश की बागडोर एक योग्य व्यक्ति, योग्य नेता के हाथों में जाएगी तो निश्चित रूप से राष्ट्र को मजबूती मिलेगी और देश विकास की राह पर आगे बढ़ेगा। अतः इस प्रक्रिया में भागीदारी करके हम अपने नेता और नेतृत्व का चयन करते हैं, जो उनके मूल्यों, आकलनों और आस्थाओं का प्रतिनिधित्व करें।
