मणिपुर में जारी हिंसा को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा जो कमेटी बनाई गई थी, मंगलवार को उसकी रिपोर्ट आ गई है. पैनल ने जली हुई बस्तियों, शवों और अन्य समस्याओं को लेकर मंथन किया है और अपनी ओर से सुझाव भी बताए हैं. सर्वोच्च अदालत ने रिटायर्ड जस्टिस गीता मित्तल की अगुवाई में एक कमेटी का गठन किया था, जिसने ग्राउंड का दौरा कर इस रिपोर्ट को तैयार किया है.
कमेटी ने कहा है कि जीपीएस मैपिंग और फोटोज़ की जांच के दम पर जो गांव नष्ट हुए हैं, उनकी संपत्ति की जानकारी निकाली जा सकती है. ताकि कितना नुकसान हुआ है और उसकी भरपाई कैसे की जाएगी, इसका आंकलन किया जा सके. राजधानी इम्फाल में बड़ी संख्या में अंजान शव रखे हैं, ऐसे में जो लोग अभी शिविरों में रुके हुए हैं उनके लिए शवों की पहचान करना मुश्किल है. पैनल ने कहा है कि स्थानीय प्रशासन को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए, जिसके जरिये परिजन इन शवों को पहचान सकें.
यहां पढ़ने वाले छात्रों को भी हिंसा की वजह से काफी नुकसान हुआ है, ऐसे में पैनल ने सुझाव दिया है कि यहां के छात्रों को अन्य राज्यों के संस्थानों में शिफ्ट कर देना चाहिए, ताकि उनकी पढ़ाई और समय का नुकसान ना हो. इस मामले में केंद्र सरकार, यूजीसी को दखल देना चाहिए और इसपर गौर करना चाहिए.पैनल ने मणिपुर हिंसा में प्रभावित हुए लोगों के लिए ये भी सुझाव दिए हैं:– लोगों का पुनर्वास उसी जगह पर किया जाए, जहां से वो विस्थापित किए गए थे– जो लोग लापता हैं, उनकी जानकारी निकालने के लिए त्वरित कार्रवाई होनी चाहिए– स्कूलों को जल्द से जल्द शुरू करने की कोशिश करनी चाहिए– आदिवासी कैदियों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी– छात्रों के डॉक्यूमेंट्स को जो नुकसान हुआ है, उन्हें कैसे सुधारा जाए इस ओर कदम उठाने चाहिए– राहत शिविरों में शिशु आहार की आपूर्ति करनी चाहिए
बता दें कि मणिपुर में 3 मई के बाद से ही हिंसा हो रही है और अभी तक 150 से अधिक लोग इसमें अपनी जान गंवा चुके हैं. मैतइ और कुकी समुदाय के बीच आरक्षण को लेकर जो विवाद शुरू हुआ था, उसने जातीय हिंसा का रूप लिया और ये आग पूरे राज्य में फैल गई थी.
