सूचना तकनीकी हो या आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद, इन सभी में आधारभूत जरूरत होती है डाटा की, और वह डाटा कहाँ स्टोर हो रहा है, कहाx उसकी प्रोसेसिंग हो रही है, यह बड़ी ही महत्वपूर्ण बात होती है और जहां यह डाटा स्टोर होता है, और जहाँ विभिन्न कंप्यूटिंग उत्पादों द्वारा डाटा प्रोसेसिंग होती है, वह जगह कहलाती है डाटा सेंटर।डेटा सेंटर के बारे में आपने सुना ही होगा। यह ऐसी जगह होती है जहां किसी कंपनी की आईटी गतिविधियों को सुचारु रूप से चलने वाले उपकरणों को रखा जाता है।
इन गतिविधियों में डाटा को स्टोर करना, सूचनाओं की प्रोसेसिंग करना, नेटवर्क का इस्तेमाल कर उसे कहीं भी भेजना, और कई प्रकार के सॉफ्टवेयर भी यहीं से चलाए जाते हैं। कभी आपने सोचा है, जो आप सोशल मीडिया इस्तेमाल करते हैं, फेसबुक, व्हाट्सप्प, इस्टाग्राम, या यूट्यूब जैसे ऍप्लिकेशन्स कहाँ से संचालित होती हैं, और इनमे आप जो डाटा डालते हैं, वो कहाँ स्टोर होता है? यह सभी एप्लिकेशन अमेरिकी हैं, और यह मूल रूप से अमेरिका से ही संचालित होती हैं।
किन्हीं ख़ास परिस्थितियों, डाटा सुरक्षा कारणों या देशों के कानूनों के अनुसार इन ऍप्लिकेशन्स को उन्ही देशों के डाटा सेंटर्स में इन एप्लीकेशन का डाटा रखना होता है।अगर हम भारत की बात करें, तो पिछले कुछ वर्षों में भारतीय सरकार द्वारा अभूतपूर्व गति से किये जाने वाले डिजिटलीकरण, सूचना प्रौद्योगिकी के बुनियादी ढांचे में सुधार, 5जी, अर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, ब्लॉकचेन और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसी आधुनिक प्रौद्योगिकियों पर काम होने के कारण भारत में नए डाटा सेंटर्स बनाने का काम बेहद तेज गति से चल रहा है।
इसके अतिरिक्त डाटा प्राइवेसी जैसे कानूनों के कारण भी देश के नागरिको के डाटा को देश में ही रखने की मांग उठने लगी है, जिसके कारण भी देसी विदेशी कंपनियां अब भारत में ही अपने डाटा सेंटर्स खोल रही है। वहीं covid महामारी के पश्चात एकाएक डाटा के इस्तेमाल में अभूतपूर्ण तेजी आयी है, सस्ते इंटरनेट ने इसे और गति ही दी है । ऐसे में डाटा की उपलब्धता बढ़ाने के लिए लोकल डाटा सेंटर बनाने की मांग ने तेजी पकड़ी है।अगर हम भारत के डेटा सेंटर उद्योग के वर्तमान आकार के बारे में बात करें, तो यह अभी लगभग 5.6 अरब डॉलर है और भविष्य में यह बेहद तेज गति से बढ़ने वाला है।
वित्त वर्ष 2025 तक देश के कुल अनुमानित डेटा सेंटर की मांग 2,100 मेगावाट होने की आशा है, जिसमें बहुत बड़े स्तर के हाइपरस्केल डाटा सेंटर्स और हाइब्रिड (क्लाउड प्लस डेटा सेंटर) की गिनती ज्यादा होगी। यह डेटा सेंटर भारतीय उद्योगों के रीढ़ की हड्डी के रूप में कार्य करेंगे, और इस कारण भारत डाटा सेंटर्स के एक वैश्विक केंद्र के रूप में उभर सकेगा। भारत की भौगोलिक स्थिति और बेहतर सूचना प्रौद्योगिकी के बुनियादी ढांचे के कारण भारत डाटा सेंटर्स उद्योग से ही कई सौ बिलियन डॉलर का सालाना रेवेन्यू कमाने में सफल होगा। डेटा सेंटर के नेटवर्क के कारण दिल्ली एनसीआर, बैंगलोर, हैदराबाद, पुणे, और कोलकाता जैसे लैंडलॉक शहरों को भी बड़ा फायदा मिलने जा रहा है।
