मौसम के उलटफेर के बीच एक और खबर लोगों को परेशान करने वाली आई है। भारतीय मौसम विभाग ने कहा है कि 6 मई के आसपास दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक चक्रवात बनने के आसार नजर आ रहे हैं इसलिए अगले 48 घंटों में मौसम का उलटफेर उड़ीसा और बंगाल के बीच देखने को मिल सकता है क्योंकि ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि एक लो प्रेशर एरिया प्रबल हो सकता है।अगर ये चक्रवात का रूप धारण करता है तो ये साल का पहला साइक्वलोन होगा जिसका असर मई के दूसरे हफ्ते में ज्यादा देखने को मिलेगा और ये काफी शक्तिशाली भी हो सकता है।
इस साइक्लोन का नाम यमन ने रखा है जो कि लाल सागर के तटीय बंदरगाह के आधार पर है। इस चक्रवात का असर पूर्वी भारत से लेकर बांग्लादेश और म्यांमार में भी देखने को मिल सकता है।फिलहाल मौसम विभाग के इस अपडेट के बाद ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने अधिकारियों की एक बैठक बुलाई थी, जिसमें उन्होंने अधिकारियों से किसी भी स्थिति के लिए तैयार रहने को कहा है।
क्या होते है साइक्वलोनसाइक्लोन या चक्रवात का नाम लेते ही आंखों के सामने बेतहाशा बारिश और तेज हवाओं की तस्वीर घूम जाती है। अगर आप इसका ग्राफ देखेंगे तो आपको लगेगा कि आप इंग्लिश का U अक्षर देख रहे हैं जो दोनों हाथों में तेज हवाओं और बारिश का झुंड लेकर आगे चल रहा है। वैसे तो ये कम दवाब वाली गर्म हवा के चारों ओर एक चक्र बनाए रखते हैं और जब ये किसी ठंडी चीज से टकराते हैं तो ये भयंकर तूफानों में तब्दील हो जाते हैं।
जिसे बहुत बारिश और तेज हवाओं चलतीहैं, जो कि अपने साथ मनुष्यों को भी उड़ाने का दम रखती हैं।साइक्लोन दो तरह से होते हैं,गोलार्ध में तूफान आता है तो इसे ‘साइक्लोन’ कहते हैं और जब Northern गोलार्ध में तूफान आता है तो इसे ‘हरीकेन’ या ‘टाइफून’ कहते हैं।
कौन रखता है नामसाल 1953 से विश्व मौसम संगठन ने एक कमेटी बनाई है जो कि तूफानों का नाम बारी-बारी से रखते हैं। इस कमेटी में 13 देश हैं जिनके नाम निम्नलिखित हैं।भारत, बांग्लादेश, म्यांमार, पाकिस्तान, मालदीव, ओमान, श्रीलंका, थाईलैंड, ईरान, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और यमन।