नई दिल्ली:– कांग्रेस नेता राहुल गांधी के पटना दौरे के बाद बिहार की सियासत में एक बार फिर से जाति आधारित गणना की चर्चा तेज हो गई है। जातीय गणना के आंकड़ों पर राहुल गांधी के सवाल उठाए जाने पर नीतीश सरकार ने साफ कह दिया है कि अगर किसी को लगता है कि आंकड़े फर्जी हैं तो बिहार सरकार उसकी जांच कराने के लिए तैयार है।
बता दें कि कांग्रेस सांसद राहुल गांधी शनिवार को बिहार के एक दिवसीय दौरे पर पटना पहुंचे थे। इस दौरान पटना के बापू सभागार में आय़ोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने बिहार में हुए जातीय गणना के आंकड़ों को फर्जी बताया था और कहा था कि जातीय गणना के नाम पर बिहार सरकार ने राज्य की जनता को बेवकूफ बनाने का काम किया है हालांकि ये और बात है कि बिहार में जाति आधारित गणना तब हुई थी जब कांग्रेस खुद बिहार सरकार में सहयोगी थी।
नीतीश सरकार ने क्या कहा?
राहुल गांधी के इस बयान पर सियासत शुरू हो गई है। जेडीयू ने राहुल गांधी के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है और सरकार में जेडीयू कोटे के मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि राहुल गांधी अपने बयान से अपने खुद को ही हास्यास्पद बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि जातीय गणना को लेकर राहुल ने जो बयान दिया वो पूरी तरह से हास्यास्पद है।
क्या बोले राहुल गांधी ?
इससे पहले दिन में पटना में ‘संविधान सुरक्षा सम्मेलन’ में बोलते हुए राहुल गांधी ने कहा, “देश की वास्तविक स्थिति को समझने के लिए जाति जनगणना होनी चाहिए। यह बिहार में की गई फर्जी जाति जनगणना की तरह नहीं होगी। जाति जनगणना के आधार पर नीति बनाई जानी चाहिए। कांग्रेस लोकसभा और राज्यसभा में जाति जनगणना पारित करेगी। हम 50 प्रतिशत आरक्षण की बाधा को खत्म करेंगे।
महागठबंधन सरकार ने कराई थी जाति जनगणना
उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि जब उन्हें पता चला कि पिछड़े समुदाय, दलितों के लोग प्रतिनिधित्व ले रहे हैं, तो उन्होंने आपको प्रतिनिधित्व दिया। लेकिन सत्ता छीन ली। सत्ता अंबानी, अडानी और आरएसएस को दे दी गई है। उन्होंने हर संगठन में अपने लोगों को रखा है। गौरतलब है कि बिहार में जाति जनगणना सीएम नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले जेडीयू-आरजेडी-कांग्रेस गठबंधन के तहत कराई गई थी।
