नई दिल्ली: – भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं की दौड़ अब और रोमांचक हो गई है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में स्टारलिंक के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की, जिसमें कंपनी के भविष्य के निवेश योजनाओं और मौजूदा साझेदारियों पर विस्तार से चर्चा हुई। इस प्रतिनिधिमंडल में स्टारलिंक के वाइस प्रेसिडेंट चैड गिब्स और सीनियर डायरेक्टर रयान गुडनाइट शामिल थे।
स्टारलिंक भारत में सेवाओं को गति देने को तैयार है, लेकिन सुरक्षा मंजूरी और स्पेक्ट्रम आवंटन के बिना यह मुमकिन नहीं है। इसी वजह से गोयल की यह मुलाकात काफी अहम मानी जा रही है, खासतौर पर तब जब भारत और अमेरिका के बीच एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते की बातचीत अपने अंतिम चरण में है।
जियो और एयरटेल के साथ समझौता पर मामला स्पेकट्रम पर अटका
मार्च में रिलायंस जियो और फिर एयरटेल ने एलन मस्क की कंपनी SpaceX के साथ स्टारलिंक को लेकर साझेदारी की घोषणा की थी। दिलचस्प बात यह है कि सरकार ने स्टारलिंक की प्रतिस्पर्धी कंपनियों जियो सैटेलाइट और भारती समूह की यूटेलसैट वनवेब को पहले ही लाइसेंस दे रखा है, लेकिन अभी तक स्पेक्ट्रम आवंटन की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। स्टारलिंक जहां 6,750 से अधिक सैटेलाइट्स की मदद से विश्व की सबसे बड़ी सैटेलाइट कंस्टीलेशन चला रही है, वहीं यूटेलसैट वनवेब के पास लगभग 600 और जियो के साझेदारों के पास मात्र 70 सैटेलाइट हैं। यही कारण है कि स्टारलिंक को इस क्षेत्र का संभावित गेम-चेंजर माना जा रहा है।
ट्राई की सिफारिश के बाद रास्ता खुलने की उम्मीद
स्टारलिंक को भारत में परिचालन शुरू करने के लिए टेलीकॉम रेग्युलेटर ट्राई की स्पेक्ट्रम नीति पर सिफारिशों का इंतजार है। एक बार यह प्रक्रिया पूरी हो जाती है, तो सुरक्षा मंजूरी के बाद स्टारलिंक भारत में अपना विस्तार कर सकता है। हालांकि यह भी देखना दिलचस्प होगा कि क्या स्टारलिंक भारत के डिजिटल भविष्य को नई दिशा दे पाएगा या फिर स्पेक्ट्रम विवाद इसे रोक देगा।
